कोविड -19 के संकट में भी संवहनीय कृषि कार्य पूरे उत्साह के साथ जारी…

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान अंतर्गत संवहनीय कृषि कार्यक्रम से राजनांदगांव जिले के 7 विकासखंडों के 592 गांवों के स्व सहायता समूहों के 59 हजार 500 महिला किसान लाभान्वित हो रही हैं। आजीविका संवर्धन के लिए इन सभी गांवों में बिहान के सामुदायिक संवर्ग के रूप में सक्रिय रूप से महिला कृषि सखी तथा पशु सखी कार्यरत हंै।

महिला कृषि सखी और पशु सखी स्वयं के प्रशिक्षण के उपरांत गांव स्तर पर स्व सहायता समूह की महिलाओं को संवहनीय कृषि कार्य के लिए प्रेरित कर रही हैं।

महिला कृषि और पशु सखियों द्वारा बताया जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए स्वस्थ शरीर व पोषण किया जा सकता है। रासायनिक कीटनाशकों की उपयोगिता को धीरे धीरे कम करके खेती की लागत को कम किया जा सकता है। जैविक पद्धति से बीजोपचार, नाडेप खाद, गोबर खाद, घनाजिवाम्रित खाद, वर्मी खाद, द्रवाजिवाम्रित घोल, एस. आर. आई. एवं कतारबद्ध विधि से फसल बोवाई करने से अधिक उत्पादन मिलता है। महिला किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि कीट प्रबन्धन के लिए गैर रासायनिक जैविक तथा गौ मूत्र से निर्मित दवाई, फेरोमैन फंदा, चिडिय़ा मीनार का उपयोग किया जाना चाहिए।

मानव व पशु शक्ति चलित कृषि यंत्र व उपकरण का उपयोग किया जाना चाहिए। किचन गार्डन, मचान विधि से घेरलू बाड़ी में सब्जी उत्पादन,किया जा सकता है। उन्नत नस्ल के पशु व कुटकुट पालन एवं मवेशियों को शत प्रतिशत टीकाकरण के लिए पशुपालकों को प्रेरित किया जा रहा है।


जिले में यह परियोजना पिछले कुछ वर्षो से संचालित है। कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के सफल मार्गदर्शन एवं निर्देशन में पिछले वर्ष के समान इस वर्ष भी महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ नाडेप खाद, घनाजिवाम्रित खाद, गोबर, खाद तैयार किया।

वर्तमान में नर्सरी लगाने तथा बुवाई के पूर्व बीजों के शुद्धिकरण के लिए देशी तरीके से बीजोपचार किया जा रहा है। साथ ही आने वाले खेती के कार्यो के लिए खेत तथा फसल में छिड़काव के लिए गौ मूत्र के उपयोग से गैर रासायनिक दवाई का निर्माण किया जा रहा है।


महिलाएं किचन गार्डन अर्थात घर के समीप बाड़ी की जमीन पर पौष्टिक तथा गैर रासायनिक सब्जी उत्पादन कर घर में उपयोग कर रही है और आंगनवाड़ी में सप्लाई कर रही है ।


महिला किसानों को विभागीय योजनाओं से अभिशरण के माध्यम से अतिरिक्त लाभ दिलाने का प्रयास भी एनआरएलएम द्वारा किया जा रहा है। इसके अंतर्गत पशुपालन विभाग के सहयोग से बैकयार्ड पोल्ट्री, बकरा, सुअर इत्यादि वितरण के लिए महिला किसानों को चयनित किया गया है। इसके अतिरिक्त महिला किसानों को पशुपालन व खेती में सुलभता के लिए मनरेगा-2 योजना से पशु शेड, मुर्गी शेड ,बकरी शेड, वर्मी कम्पोस्ट टांका, नाडेप टांका, अजोला टांका का निर्माण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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