
छत्तीसगढ़…धमतरी जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों को खाद संकट और कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा उर्वरक वितरण में पारदर्शिता और निर्धारित दरों पर बिक्री के निर्देश दिए जाने के बावजूद कई क्षेत्रों से खाद की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
26 मई 2026 को कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय धमतरी में उर्वरक विक्रेताओं की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में अनुविभागीय कृषि अधिकारी मनोज सागर ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को किसानों को नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से खाद वितरण करने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों ने फसलवार अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का विक्रय सुनिश्चित करने तथा किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न होने देने की बात कही थी।
लेकिन किसानों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। रविवार को साकरा फॉरेस्ट चेक पोस्ट के पास खाद से भरा एक ट्रैक्टर पहुंचा, जहां किसानों से पूछताछ करने पर कई गंभीर तथ्य सामने आए। किसानों के पास खाद खरीदने के वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे और अधिकांश के पास केवल हस्तलिखित कच्ची रसीद थी।
किसान शिवलाल, बुधराम, लखन लाल और विष्णु ने बताया कि उन्हें सरकारी दर 266 रुपये प्रति बोरी वाली यूरिया 650 रुपये में दी गई। किसानों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है, क्योंकि खेती का समय निकलने पर उनकी फसल प्रभावित हो सकती है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ व्यापारी खाद बेचते समय यह हिदायत देते हैं कि यदि कोई अधिकारी पूछताछ करे तो सरकारी निर्धारित दर बताना, अन्यथा भविष्य में खाद नहीं मिलेगी।
266 की यूरिया 800 से 1000 रुपये तक!
नगरी ब्लॉक के कई गांवों से भी खाद की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों के अनुसार, 266 रुपये प्रति बोरी वाली यूरिया 800 से 1000 रुपये तक और 1350 रुपये की डीएपी खाद 2200 से 2500 रुपये तक बेची जा रही है। आरोप है कि कुछ दुकानदार रोजाना अपने हिसाब से कीमत तय कर किसानों से मनमानी वसूली कर रहे हैं।
जांच और निगरानी पर उठे सवाल…
मामले की जानकारी लेने पर ब्लॉक कृषि अधिकारी लकेश कुमार साहू ने बताया कि वे धमतरी में हैं और कृषि निरीक्षक को मौके पर जांच के लिए भेज रहे हैं। हालांकि किसानों के अनुसार काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
दोबारा संपर्क करने पर कृषि अधिकारी ने बताया कि संबंधित दुकान की पीओएस मशीन खराब होने की जानकारी मिली है और व्यापारी को किसानों को स्क्रीनशॉट अथवा वैकल्पिक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों ने की सख्त कार्रवाई की मांग…
लगातार बढ़ रही शिकायतों के बीच किसानों ने जिला प्रशासन से खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने, दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा उचित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो खरीफ सीजन की खेती प्रभावित हो सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।



