CG – नक्सल गढ़ में आजादी का जश्न : 80 साल बाद सुकमा के 50 गांवों में फहराया गया तिरंगा, जहां कभी था खौफ का साया……

सुकमा। देश जहां 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित रहे 50 गांवों के लिए यह दिन इतिहास बन गया। दशकों तक दहशत के साये में रहने वाले इन गांवों में पहली बार ग्रामीणों ने बिना किसी डर के तिरंगे तले स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह सिर्फ ध्वजारोहण नहीं, बल्कि नक्सल भय से आजादी और बदलते सुकमा की नई तस्वीर का प्रतीक बन गया।
कभी इन इलाकों में नक्सली प्रभाव के चलते राष्ट्रीय पर्व के दौरान काले झंडों का दबदबा दिखाई देता था। तिरंगा फहराना और खुले तौर पर स्वतंत्रता दिवस मनाना ग्रामीणों के लिए आसान नहीं था। अब हालात बदल रहे हैं और गांवों में तिरंगा शान से लहराने लगा है।
नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों और प्रशासन की कार्रवाई के बाद इन इलाकों में हालात तेजी से बदले हैं। 31 मार्च के बाद नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है और प्रशासन की पहुंच भी बढ़ी है। जिन गांवों में कभी सरकारी गतिविधियां चलाना और राष्ट्रीय पर्व आयोजित करना चुनौती माना जाता था, वहां अब ग्रामीण खुलकर तिरंगे के साथ नजर आ रहे हैं।
इस बार इन गांवों में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्रामीण तिरंगे को सलामी देंगे। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक में इसे लेकर खास उत्साह है। उनके लिए यह सिर्फ झंडा फहराने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लंबे समय तक डर और बंदिशों के बीच रहने के बाद खुले माहौल में आजादी का जश्न मनाने का मौका है। गांवों में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर तैयारियां भी की जा रही हैं।
बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक राष्ट्रीय पर्व नक्सली विरोध और बंद के साये में रहे। कई जगहों पर ग्रामीण तिरंगा फहराने से भी डरते थे। अब वही तस्वीर बदलती नजर आ रही है। जहां कभी काले झंडे और बंदूक का साया था, वहां अब तिरंगा और राष्ट्रगान दिखाई-सुनाई दे रहा है। यह बदलाव ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।



