छत्तीसगढ़

CG – हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता मां-बेटी पर ठोका जुर्माना, कोर्ट इस वजह से हुआ नाराज, जाने क्या है पूरा मामला…..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आपराधिक मामलों में प्रक्रिया संबंधी लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, निचली अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद, आदेश को चुनौती दिए बिना सीधे एफआईआर और चार्जशीट निरस्त कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर नहीं कर सकते।

डिवीजन बेंच ने याचिका को वापस लेने की अनुमति देने के साथ ही कोर्ट का कीमती समय खराब करने के लिए याचिकाकर्ता मां-बेटी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। जुर्माने की राशि को अंबिकापुर के गंगापुर स्थित शासकीय विशेष विद्यालय ( दिव्यांग बालिकाओं) को देने का निर्देश दिया है।

पढ़िए क्या है मामला?

मामला छत्तीसगढ़ बिलासपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पुराना हाई कोर्ट परिसर के पीछे शारदा मंदिर के पास रहने वाली गोमती वर्मा और उनकी बेटी माही वर्मा के खिलाफ नाबालिग की शिकायत पर 28 नवंबर 2025 को पुलिस ने अपराध दर्ज किया था। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 351(2) और 3(5) के तहत निचली अदालत में चार्जशीट पेश की। सीजेएम ने संज्ञान लेकर मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी JMFC की अदालत में भेज दिया। इसी बीच गोमती व माही ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर, चार्जशीट, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की।

अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने मांगी अनुमति

सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने पाया, जेएमएफसी कोर्ट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिया था। बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में जेएमएफसी द्वारा आरोप तय करने को चुनौती ही नहीं दी थी, जबकि वही मुकदमे की आगे की कार्यवाही का आधार था। जब कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता से पूछा तब अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।

हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

याचिका की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, मूल आदेश को चुनौती दिए बिना सीधे हाई कोर्ट के असाधारण अधिकार क्षेत्र का सहारा लेना याचिकाकर्ताओं की लापरवाही दर्शाता है। इस तरह की याचिकाओं से न्यायालय का बहुमूल्य समय अनावश्यक रूप से व्यर्थ होता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर 5,000 रुपये जुर्माना ठोका है।

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