छत्तीसगढ़

CG – लाखो खर्च कर संवारा था अब वन विश्राम गृह स्थित तालाब दिन में बना लवर पॉइंट…रात में शराबियों का अड्डा सो रहें जिम्मेदार जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

0 वन विभाग की घोर लापरवाही से तालाब में बढ़ रही गंदगी, पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी व्याप्त.

कोरबा//वन विश्राम गृह के किनारे स्थित वन विभाग का शांत और हरा- भरा तालाब सरकारी पैसे की बर्बादी और रखरखाव की अनदेखी का जीता- जागता नमूना बन चुका है। 7- 8 साल पहले वन विभाग ने लाखों रुपए खर्च कर इस तालाब का सौंदर्यीकरण कराया था, ताकि स्थानीय एवं आसपास लोगों को एक बेहतर पर्यावरणीय स्थल मिल सके। लेकिन चारो तरफ पेड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा इस तालाब की दशा देखरेख के अभाव में जीर्ण- शीर्ण हो गया है और अब यह दिन में लवर पॉइंट तो शांझ ढलने के बाद शराबियों के अड्डे में तब्दील हो जाता है।

पिछले कुछ महीनों से वन विश्राम गृह स्थित इस तालाब की पहचान बदल गई है। दिन में यहां बाइक पर सवार प्रेमी जोड़े पहुँचते है और घण्टों समय बिताते हैं तो शाम ढलने के बाद तालाब के किनारे बनी सीढ़ियों और पेड़ों की आड़ शराब पीने का अड्डा बन जाता है। गत तकरीबन 7- 8 साल पहले वन विभाग ने सौंदर्यीकरण के तहत लाखों रुपए खर्च कर तालाब के किनारे सीढ़ियां, रेलिंग, बैठने की जगह और पाथवे बनाकर इसे पर्यटन स्थल जैसा रूप दिया था।

दावा था कि यहां परिवार के साथ लोग समय बिता सकेंगे। पर अनदेखी के अभाव के कारण हकीकत में साफ है- सीढ़ियां टूट चुकी है, रेलिंग जीर्ण- शीर्ण है, चारो तरफ प्लास्टिक, कोल्ड ड्रिंक की बोतलें, चिप्स के पैकेट, कागज और खाने- पीने का कचरा बिखरा है। शराब की खाली शीशियां पड़ी हुई है, पाथवे उखड़ चुकी है और तालाब का पानी गंदा होने लगा है। वन विभाग द्वारा देखरेख न होने से प्राकृतिक सुंदरता वाले इस तालाब किनारे सुबह- शाम टहलने वाले परिवार भी नदारद है। कारण यह कि दिन के उजाले में उक्त स्थल को प्राइवेसी पॉइंट बना लिया गया है तो वहीं शाम होने पश्चात शराब प्रेमियों का सुरक्षित स्थान बन गया है। इसी असहज माहौल के कारण परिवार यहां आने से कतराने लगे है।

हैरानी की बात है कि यह सब वन विश्राम गृह की बाउंड्री से लगा हुआ हो रहा है, जहां वन कर्मचारियों की चौबीसो घण्टे ड्यूटी रहती है। फिर भी तालाब किनारे बढ़ती अराजकता पर न कोई टोकने वाला है, न रोकने वाला, निगरानी व्यवस्था बिल्कुल शून्य है। जो वन विभाग की उदासीनता को बता रही है। अब सवाल यह उठता है कि जब सौंदर्यीकरण पर लाखों खर्च कर देखरेख नही करनी थी तो सरकारी तिजोरी से पैसा बहाने का मतलब क्या?

इसे लेकर स्थानीय नागरिकों में खासी नाराजगी है तथा उनका कहना है कि वन विभाग पर्यावरण बचाने के लिए है या बर्बाद करने के लिए। उनकी मांग है- तालाब की सफाई और टूटी रेलिंग- सीढ़ियों, पाथवे की मरम्मत कराई जाए, मेंटनेंस के लिए कर्मचारी की नियुक्ति हो, दोपहर- शाम वनकर्मी या पुलिस की नियमित गश्त हो, गंदगी और नशाखोरी करने वालों पर चालानी कार्रवाई हो और बैठने के लिए व्यवस्थित जगह बनाई जाए ताकि परिवार आ सके।

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