
ब्रिटिश कालीन 1927 का शासकीय स्कूल दुगली,पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जहां चरण पड़ा आज भी अहाता विहिन,जब शासन,प्रशासन और पंचायत ने अनदेखी किया तो पालकों ने जनसहयोग और चंदा से किया कांटे तार से घेराव।
छत्तीसगढ़ धमतरी जिला के ब्रिटिश कालीन एतिहासिक गांव,जहां से अंग्रेजी शासन का सत्ता ब्रिटिश शासक करते थे।जिस ग्राम का वन विश्राम गृह 1919 निर्माण निर्माण हुआ है।जिस गांव में कोयला और पानी से,भाप इंजन से लकड़ी आरा मिल संचालित होता था।जिस ग्राम से ब्रिटिश कालीन दौरान स्लीपर ट्रेन चला करते थे।ऐसा ऐतिहासिक गांव का ऐतिहासिक शिक्षा का मंदिर मूलभूत आवश्यकता के लिए तरस रहा है। स्कूल भवन तो है मगर अहाता नहीं है ज्ञात हो दुगली मेघा मार्ग से स्कूल लगा हुआ है चौबिसों घंटे बड़ी बड़ी वाहन गुजरते रहते हैं। हमेशा दुर्घटना का आशंका बना रहता है। शासन प्रशासन से पालक समिति कई दफा अवगत करा चुके हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हुआ। वहीं ग्राम पंचायत भी मद का अभाव बताकर किनारे हो जाते हैं। जबकि शिक्षा मद से राशि लगाकार जनहित के लिए कार्य कराया जा सकता है।
ऐसे स्थिति में स्कूल की विकास के लिए पालक समिति ने अपना स्वमेव कदम बढ़ाया और जनसहयोग के साथ चंदा एकत्र कर स्कूल की बाउंड्री को तार घेरा से निर्माण किया।एक तरफ से शासन और प्रशासन के लिए शर्मशार है वहीं पालक समिति की जज्बा जुनून अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और सुरक्षा के लिए जनभागीदारी का एक मिशाल है।

पालक समिति के अध्यक्ष श्यामा चरण मंडावी और पूर्व अध्यक्ष सुर्य कुमार सलाम ने शासन प्रशासन से जिले के वनांचल क्षेत्र की एक मात्र धरोहर स्कूल की मूलभूत आवश्यकताओं पर निदान की मांग रखे हैं। वहीं जनभागीदारी की मिसाल दौरान पालक समिति और शाला समिति के सदस्य किशोर कुमार नेताम,कुलेश्वर डोंगरे,जोगीराम टेकाम,देवबत्ती, कमलेश मरकाम, राकेश सेन,तिलक राम,वेदांती विश्वकर्मा,सुरेश सलाम, हरिशंकर,विनोद वट्टी,सोनदेव मरकाम, नरेंद्र दर्रों,ममता विश्वकर्मा,धिरसिंग, युधिष्ठिर,सुखनंदन मरकाम,नरेंद्र ध्रुव,दलीचंद मंडावी,राजेश मरकाम,कान्ताप्रसाद,देवशन मरकाम,जानसिंग,राजेश्वर नेताम,शंकर सेन,गोमती मंडावी लक्ष्मी नेताम,पिंकी नेताम,ज्योति मंडावी,माया मरकाम, रेखा नेताम,विद्या मरकाम,रुपई वट्टी, संतोषी बाई सहित पालकगण उपस्थित रहे।
