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CG – चेतना-छात्र जागरूकता अभियान” के तहत शा.हा.से.स्कूल मोपका में किया गया छात्राओं को जागरूक मानव श्रृंखला बनाकर निकाली गई जागरूकता रैली पढ़े पूरी ख़बर

0 छात्रों ने यातायात तख्तियों के माध्यम से लोगों को दिया यातायात नियमों के पालन के संदेश

0 कार्यक्रम में यातायात, महिला एवं बाल अपराध, साइबर अपराध, नशा मुक्ति, मोबाइल की लत, बुजुर्गों के अधिकार एवं सम्मान, पर्यावरण आदि अनेक विषय पर हुआ कार्यशाला।

0 कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने छात्र छात्राओं को दिया यातायात नियमों के पालन के सिख

0 कार्यक्रम के अंत मे छात्राओं सहित सभी को दिलाई गई यातायात नियमों के पालन हेतु सपथ*

मिली जानकारी के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के दिशा निर्देश में बिलासपुर पुलिस के द्वारा चलाए जा रहे “चेतना अभियान” के तहत नियमित रूप से चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम के विभिन्न चरणों का विस्तार करते हुए वृहद रुप में सभी जागरूकता कार्यक्रमो का समन्वित द्वितीय चरण का आज जिला एवं पुलिस प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में “चेतना- छात्र जागरूकता अभियान” स्वामी आत्मानंद”शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल मोपका बिलासपुर”में किया गया

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे एवं विद्यालय प्राचार्य कौशिक,सम्माननीय अभ्यागतो के गरिमामय आगमन एवं नागरिक संगठनों,छात्र छात्राओं,माता-पिता, अभिभावकों एवं गणमान्य नागरिकगणों के विशाल उपस्थिति एवं सहभागिता में प्रातः 09 बजे बजे से प्रारम्भ हुआ।

कार्यक्रम के प्रारंभ के पूर्व विद्यालय के मुख्य द्वार पर छात्र-छात्राओं द्वारा उत्साह पूर्वक अतिथियों का तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा और आरती के साथ अतिथियों का स्वागत अभिनंदन किया गया। अतिथियों को एन सी सी के स्काउट छात्राओं द्वारा पायलेटिंग कर मुख्य मंच तक लाया गया। तत्प्श्चात बालिकाओं द्वारा माँ सरस्वती वंदना के गुंजन के साथ अतिथियों के द्वारा माँ सरस्वती के छायाचित्र पर पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया गया।

इसके पश्चात स्काउट गाइड के छात्रों के द्वारा मुख्य अभ्यागतों एवं अतिथियों को सम्मानपूर्वक मंचासीन किया गया। सभी अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण और पुष्प गुच्छ से किया गया।तत्प्श्चात विद्यालय के प्राचार्या श्रीमती जोशी द्वारा स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम के उद्देश्य, रूपरेखा और मुख्य विषय के बारे में अवगत कराया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में एएसपी रामगोपाल करियारे ने कहा कि ” छात्र छात्राएं यातायात पुलिस के संवाहक रूप में नागरिक समुदाय के सभी वर्गों को प्रभावित करते है” क्योंकि बच्चों के द्वारा अपने माता पिता, अभिभावकों, पालकों एवं रिस्तेदारों को सहज रूप में स्कूल के माध्यम से दी गयी जानकारियों को कठोरता से पालन करने की जिद की जाती है। आज के छात्र-छात्राएं अपने माता-पिता अभिभावकों के सापेक्ष आधुनिक तकनीकी शिक्षाओं के कारण प्रत्येक नवीनता से अद्यतन होते हैं अतः इन्हें किसी भी क्षेत्र में हुए नवीनता के प्रति सहजतापूर्वक अनुकूल होने में आसानी होती है मोटर अधिनियम के नियमों में हुए अद्यतन परिवर्तन के संबंध में छात्र-छात्राओं को अवगत कराते हुए समस्त नियमों के प्रति अपने माता-पिता एवं पालकों को संदेश प्रसारित करने हेतु समाझाइस दी गयी है।

इस दौरान छात्र छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का मंचन कर यातायात, साइबर, नशामुक्ति, नारी जागरण, महिला एवं बाल अपराध, मोबाइल एडिक्शन/ लत, चेतना शियान आदि पर आधारित नृत्य,गायन, नुक्कड़ नाटक आदि के माध्यम से उपस्थित छात्र छात्राओं एवं गणमान्य जनो को विशेष संदेश दिया गया।

जागरूकता कार्यक्रम से संबंधित विशेषज्ञो, मास्टर ट्रेनर एवं अतिथियों के द्वारा छात्र-छात्राओं को यातायात, महिला एवं बाल अपराध, साइबर अपराध, नशा उन्मूलन, मोबाइल की लत, पर्यावरण जागरूकता, सियान चेतना आदि विभिन्न विषयों पर आधारित विस्तृत चर्चा और व्याख्यान दिया गया। साथ ही छात्र-छात्राओं से तत्सबन्ध में विभिन्न प्रकार के प्रश्नोत्तर करके बच्चों के प्रश्नों के जिज्ञासाओं को शांत भी किया गया बच्चों ने बड़ी तन्मयता और सक्रियता के साथ आज के इस विशेष कार्यक्रम का गंभीरता पूर्वक श्रवण किया।

इस कार्यक्रम में जिला एवं पुलिस प्रशासन सहित महिला बाल विकास, शिक्षा विभाग एवं अन्य विभिन्न विभागों ने अति सक्रियता के साथ चेतना के सातों आयामों पर विस्तृत जानकारियां छात्र-छात्राओं को प्रदान करने हेतु कार्यक्रम को प्रत्येक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने एवं प्रत्येक स्कूल के छात्र-छात्राओं को कार्यक्रम के सातों चरण से अवगत कराए जाने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के संबंध में विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम के समापन पूर्व उपस्थित समस्तजनों को यातायात नियमों के प्रति सदैव संवेदनशीलता के साथ पालन किए जाने एवं सदैव निष्ठावान रहने हेतु मास्टर ट्रेनर उमाशंकर पांडे के द्वारा मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में शपथ दिलाई गई। मुख्य अभ्यागतों के गरिमामयी आगमन एवं उपस्थित सभी जनो के विशेष सहभागिता हेतु कृतज्ञता के साथ आभार प्रदर्शन किया गया।

“चेतना- छात्र जागरूकता अभियान” के तहत छात्र-छात्राओं एवं आमजन को यातायात की पाठशाला के तहत यातायात के नियमों एवं प्रावधानों के संबंध में, चेतना विरुद्ध महिला अपराध के तहत महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के संबंध में विधिक प्रावधानों एवं सुरक्षा के उपाय के संबंध में छात्र-छात्राओं को बताई गयी। चेतना विरुद्ध नशा के तहत युवाओं एवं आमजन में बढ़ रहे नशा के प्रभाव एवं उसके दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए लोगों को नशा छोड़ने एवं आने वाले भविष्य के बेहतर निर्माण के संबंध में अभ्यागत व विशेषज्ञों के द्वारा विशेष व्याख्यान दिया गया।

आओ सवेरे कल अपना के तहत बालक बालिकाओं एवं छात्रों में मोबाइल के प्रति लत एवं मुख्य धारा से भटकने की प्रवृत्ति को रोकने हेतु खेल एवं अन्य के माध्यम से सकारात्मक दिशा की ओर ले जाकर राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु विशेष प्रयास के संबंध में छात्र-छात्राओं एवं बालकों को समझाइस दी गयी।
सियान चेतना अभियान के तहत अति वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान के भाव विकसित करना तथा उनके सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु सदैव लोगों के मन में पूज्य मानवीय दृष्टिकोण विकसित कर बुजुर्गों के सेवा सुश्रुषा एवं कुशल क्षेम के प्रति जागरूक रहने लोगों को समझाइस दी गयी।

चेतना पर्यावरण मित्र के तहत लोगों को पर्यावरण के प्रति सदैव जागरूक रहते हुए सतत विकास के क्रम में स्वच्छ हवा एवं जलवायु हेतु अधिक से अधिक पौधा लगाने एवं पृथ्वी को हरियाली से आच्छादित करने हेतु अपील करते हुए जागरुक किया गया। कार्यक्रम के अंत में समस्त छात्र-छात्राओं एवं विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाओं व प्राचार्य के द्वारा छात्र-छात्राओं के विशेष सहयोग से मानव श्रृंखला बनाकर हाथों में यातायात एवं अन्य विषयों पर आधारित तख्तियां लेकर आम नागरिकों को यातायात नियमों के पालन तथा किसी भी प्रकार के अपराध से दूर रहने हेतु नारा लगाते हुए यातायात जागरूकता रैली निकाली गई।

समग्र “चेतना- छात्र जागरूकता अभियान कार्यक्रम” के तहत मुख्य अतिथि के रूप में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे, स्कूल प्राचार्य जोशी, शाला विकास समिति के सभी सदस्यगण, यातायात मास्टर ट्रेनर उमाशंकर पांडेय, सपना महिला समिति के अध्यक्षा सपना सराफ, वरिष्ठ सदस्य सड़क सुरक्षा समिति अशोक श्रीवास्तव,राजकुमार सुखवानी,अब्दुल हमीद, शैलेंद्र सिंह, जीवधरणी फाउंडेशन के अध्यक्ष विकास वर्मा,अन्य शिक्षक गण एवं अन्य गणमान्य नागरिकगण विशेष रूप से मौजूद थे।

CG – हेड कांस्टेबल सस्पेंड : SSP ने दिखाया सख्त रुख, हेड कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से किया सस्पेंड, इस वजह से गिरी निलंबन की गाज, जाने पूरा मामला..…

बिलासपुर। पुलिस ने जुए के फड़ पर कार्रवाई के बाद एक किसान से पहले तो 10 हजार रूपये रिश्वत लिये। इसके बाद उसे मामले में आरोपी भी बना दिया। मामले की शिकायत के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

पुलिस जवान द्वारा अवैध वसूली का ये पूरा मामला बिल्हा थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक बिल्हा पुलिस को 19 जुलाई को ग्राम केसला में जुए का फड़ चलने की सूचना मिली थी। मुखबिर से मिले इस सूचना के बाद पुलिस ने ग्राम केसला के मावली मंदिर के पास छापामार कार्रवाई की थी। मौके पर फड़ लगाकर जुआ खेल रहे 5 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पेंडरवा निवासी इना कुमार, रवि कुमार कौशिक, केसला निवासी जितेन्द्र कुमार चतुर्वेदी, मनीष साहू और चिचिरदा निवासी रवि प्रकाश कौशिक को आरोपी बनाया। पुलिस की कार्रवाई में आरोपी बने रवि कौशिक ने पुलिस पर फर्जी तरीके से कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया।

उसने आरोप लगाया कि वो अपने खेत गया था। मंदिर के पास उसने अपनी बाइक खड़ी की थी। जिसे पुलिस ने बिना किसी सबूत और सूचना के जब्त कर अपने साथ ले जा रही थी। इसकी जानकारी मिलने पर वह खेत से मौके पर पहुंचा। तब पुलिसकर्मियों ने उसे भी जुआरी बताकर थाना ले गए।

पीड़ित किसान ने एसएसपी से की शिकायत

पुलिस की कार्रवाई से पीड़ित रवि प्रकाश कौशिक ने एसएसपी रजनेश सिंह से इस मामले की शिकायत की है। उसने बताया कि बिना किसी साक्ष्य के पुलिस ने उसे पकड़कर थाने ले आयी। इसके बाद उससे 20 हजार रुपए की रिश्वत के रूप में मांगा गया। जिस पर उसने इतनी बड़ी रकम दे पाने में असमर्थता जता दी। तब उससे पुलिस जवान ने कार्रवाई से बचने के नाम पर 10 हजार रुपए देने कहा गया।

जिसके बाद प्रधान आरक्षक बलराम विश्वकर्मा ने एक पुलिसकर्मी को उसके साथ च्वाइस सेंटर भेजा गया। जहां से उसने पैसे निकालकर 10 हजार रुपए पुलिस जवान को दे दिये। इसके बाद भी उसके खिलाफ जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई कर आरोपी बनाया गया। पीड़ित किसान ने च्वाइस सेंटर से पैसे निकालने के साक्ष्य भी एसएसपी को दिये। जिसके बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने प्रधान आरक्षक बलराम विश्वकर्मा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर विभागीय जांच के आदेश दे दिये है।

Uttarakhand Panchayat Elections: बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंच रहे मतदाता, CM धामी ने पोस्ट कर जनता से की ये खास अपील…

उत्तराखंड : गुरुवार यानी आज प्रदेश के सभी जनपदों (हरिद्वार को छोड़कर) प्रथम चरण का मतदान किया जा रहा है. जिसे लेकर ग्रामीण लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. लोग बारिश और खराब मौसम के बीच भी मतदान करने पहुंच रहे हैं. हालांकि, सीएम धामी ने भी पोस्ट कर अधिक-अधिक वोट करने की अपील की है.

सीएम धामी ने पोस्ट कर कहा, सशक्त पंचायतें, सशक्त… उत्तराखंड आज त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव के प्रथम चरण का मतदान हो रहा है. प्रदेश की समस्त देवतुल्य जनता से अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में मतदान केंद्र पहुंचें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें. अपने मत से ऐसे योग्य, जागरुक और जनसेवा के प्रति समर्पित प्रतिनिधियों का चयन करें, जो आपकी आवाज को मजबूती से उठाएं और ग्रामीण विकास की नींव को सशक्त बनाएं. आपका एक वोट, सुदृढ़ पंचायतीराज व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

17829 प्रत्याशियों का भविष्य मत पेटी में होगा कैद

ग्राम पंचायत के 948 पदों सापेक्ष 2247 प्रत्याशी प्रतिभाग करेंगे. प्रधान ग्राम पंचायत के 3393 पदों सापेक्ष 9731 प्रत्याशी प्रतिभाग करेंगे. सदस्य क्षेत्र पंचायत के 1507 पदों सापेक्ष 4980 प्रत्याशी प्रतिभाग करेंगे. सदस्य जिला पंचायत के 201 पदों सापेक्ष 871 प्रत्याशी प्रतिभाग करेंगे. 24 जुलाई को प्रथम चरण के होने वाले मतदान में लगभग 26 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. ऐसे में आज 17829 प्रत्याशियों का भविष्य मत पेटी में कैद हो जाएगा.

CG High Court ब्रेकिंग : TI सहित तीन पुलिस कर्मियों को 10 साल की सजा, कोर्ट ने इस वजह से सुनाई कठोर सजा…..

बिलासपुर। हिरासत में मौत के मामले में ट्रायल कोर्ट ने टीआई और तीन पुलिस कर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अपील की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के आजीवन कारावास की सजा को 10 वर्ष में बदल दिया है। सजा में बदलाव करने के साथ ही हाई कोर्ट ने ऐसे कृत्य पर गंभीर टिप्पणी की है। अपनी टिप्पणी में हाईकोर्ट ने कहा है कि हिरासत में मौत ना सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि यह लोकतंत्र और मानवाधिकारों के खिलाफ गहरी चोट है। जब रक्षक की भक्षक बन जाए तो यह समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। हत्या का इरादा नहीं होने पर इसे आजीवन कारावास की सजा को हत्या में बदल आजीवन कारावास की सजा को 10 वर्ष कर दिया गया है।

मामला वर्ष 2016 का है। जांजगीर जिले के मुलमुला थाने में वर्ष 2016 में ग्राम नरियरा निवासी सतीश नोरगे को हिरासत में लिया गया था। उसे पर शराब पीकर हंगामा करने का आरोप था। पुलिस ने देर रात हिरासत लिया था। सुबह तक उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 26 चोटों के निशान पाए गए थे। यह मामला उस वक्त काफी सुर्खियों में रहा था। ग्रामीणों ने थाने का घेराव भी किया था। इसके बाद थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह राजपूत, आरक्षक दिलहरण ,सुनील ध्रुव और नगर सैनिक राजेश कुमार के खिलाफ हत्या और एक्ट्रोसिटी का अपराध दर्ज हुआ था। चालान प्रस्तुत होने के बाद ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2019 में टीआई और आरक्षकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ टीआई व आरक्षकों ने हाई कोर्ट में अपील पेश की थी। मृतक युवक की पत्नी ने हाई कोर्ट में अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी की डिवीजन बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में लिखा है कि हिरासत में मौत न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि यह लोकतंत्र और मानवाधिकारों के खिलाफ गहरी चोट है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो यह समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। हालांकि अदालत ने इसे गैरइरादतन हत्या का मामला माना।

अदालत ने अपने फैसले में लिखा है कि हत्या की मंशा स्पष्ट नहीं थी, लेकिन आरोपी जानते थे कि पीटने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इस वजह से हाई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 304 भाग एक के तहत गैर इरादतन हत्या मान सजा को उम्र कैद से घटाकर 10 साल का कठोर कारावास कर दिया। एक्ट्रोसिटी मामले में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा है कि पुलिसकर्मी जानते थे कि मृतक अनुसूचित जाति का है। इसलिए सभी पुलिस कर्मियों को एक्ट्रोसिटी एक्ट से बरी कर दिया।

एफआईआर के बाद से सभी पुलिसकर्मी जेल में ही है। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद सजा काट रहे हैं। अब बाकी सजा पूरी करवाने के लिए बिलासपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक को आदेश की कॉपी भेजने का निर्देश डिवीजन बेंच ने दिया है।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: CM साय ने गौरी-गणेश, नवग्रह की पूजा कर भगवान शिव का किया अभिषेक….

रायपुर: छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के पहले पर्व “हरेली” पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में गौरी-गणेश, नवग्रह की पूजा कर भगवान शिव का अभिषेक किया। पहली बार मुख्यमंत्री निवास में हरेली के पूजन में भिलाई की ग्रेजुएट सुश्री धनिष्ठा शर्मा ने अपने बड़े भाई श्री दिव्य शर्मा के साथ भगवान शिव के अभिषेक में मंत्रोच्चार किया, इससे मुख्यमंत्री श्री साय एवं उनके परिजनों सहित मौजूद सभी अतिथि प्रभावित हुए।

हरेली के पूजा-पाठ में विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खेती किसानी के कामों में उपयोग होने वाले नांगर, रापा, कुदाल व दूसरे कृषि यंत्रों की विधिवत पूजा-अर्चना कर हरेली उत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के किसानों समेत समस्त छत्तीसगढ़ वासियों की ख़ुशहाली एवं सुख-समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पशुधन संरक्षण के संदेश के साथ गाय और बछड़े को पारंपरिक लोंदी और हरा चारा खिलाया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली पर्व केवल किसानों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण और पशुधन से जुड़े हमारे गहरे रिश्ते को भी दर्शाता है। इस दिन गाय एवं अन्य मवेशियों को गेहूं के आटे, नमक और अरंडी के पत्तों से तैयार लोंदी खिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पशुओं को कई प्रकार की बीमारियों से बचाव मिलता है और उनकी सेहत बेहतर रहती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में पशुओं को परिवार का सदस्य माना गया है। हरेली का यह पर्व हमें पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी परंपराओं से जुड़ें और पशुधन की देखभाल एवं सुरक्षा को प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस अवसर पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिवेश और पूजा-पद्धति के साथ लोक संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार का पारंपरिक आरंभ: छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू और सांस्कृतिक विरासत की झलक….

रायपुर: छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।

काठा

सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

खुमरी

सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

कांसी की डोरी

यह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

झांपी

ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

कलारी

बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: पारंपरिक लोक यंत्रों के साथ सुंदर नाचा का हो रहा आयोजन…

रायपुर: मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार के अवसर पर पारंपरिक लोक यंत्रों की गूंज और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा के साथ सुंदर नाचा का आयोजन किया जा रहा है। पूरा परिसर उत्सवमय वातावरण से सराबोर है। ग्रामीण परिवेश की जीवंत छवि इस सुंदर माहौल में साकार हो गई है। कहीं सुंदर वस्त्रों में सजे राउत नाचा कर रहे कलाकारों की रंगत बिखरी है, तो कहीं आदिवासी कलाकार पारंपरिक लोक नृत्य की मोहक प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का अद्भुत ग्रामीण लैंडस्केप अपनी संपूर्ण सांस्कृतिक सुंदरता के साथ यहां सजीव रूप में अवतरित हो गया है। विभिन्न प्रकार की लोक धुनों में छत्तीसगढ़ी संगीत का माधुर्य अपने चरम पर है। राउत नाचा, छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर गोधन पूजा के दौरान किया जाता है। यह नृत्य विशेषकर यादव समुदाय (ग्वाला/गोपालक वर्ग) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोधन की आराधना का प्रतीक माना जाता है।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: पारंपरिक लोक यंत्रों के साथ सुंदर नाचा का हो रहा आयोजन

राउत नाचा की परंपरा छत्तीसगढ़ में सदियों पुरानी है। इसे गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है, जब ग्वाल-बाल भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में यह नृत्य करते हैं। नर्तक रंग-बिरंगे परिधानों में सजते हैं, सिर पर पगड़ी धारण करते हैं और हाथों में लाठी थामे रहते हैं। उनके वस्त्रों को कौड़ियों, घुंघरुओं और अन्य सजावटी वस्तुओं से अलंकृत किया जाता है।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: पारंपरिक लोक यंत्रों के साथ सुंदर नाचा का हो रहा आयोजन

राउत नाचा की प्रस्तुति के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों — जैसे ढोल, मांदर और नगाड़ा — का प्रयोग होता है। इनकी थाप पर नर्तक सामूहिक रूप से तालबद्ध होकर नृत्य करते हैं।यह नृत्य केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, श्रम की महत्ता, पशुपालन के योगदान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी देता है। नाचा के साथ गाए जाने वाले गीतों को ‘राउत गीत’ कहा जाता है, जिनमें धर्म, वीरता, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन होता है।

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: पारंपरिक लोक यंत्रों के साथ सुंदर नाचा का हो रहा आयोजन

CG – 2 शिक्षिका की मौत : दर्दनाक हादसा, शिक्षक और छात्रों से भरी वेन और ट्रक में हुई जोरदार भिड़ंत, 10 शिक्षक सहित 2 छात्र हुए घायल, इलाज केदौरान 2 की मौत…..

कोरबा। जिले में सड़क हादसे का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस बिच खबर है कि कोरबा में एकलव्य विद्यालय के शिक्षक और छात्रों को लेकर जा रही विंगर वेन और माजदा ट्रक के बीच टक्कर हो गयी। इस भीषण हादसे में दो महिला शिक्षिका की दर्दनाक मौत हो गयी। वहीं गंभीर रूप से घायल 5 अन्य शिक्षकों को मेडिकल कालेज अस्पताल मे रिफर किया गया है। आपको बता दे यह दुर्घटना आज सुबह कटघोरा से पोड़ी-उपरोड़ा स्थित एकलव्य विद्यालय जाने के दौरान हुई। दुर्घटना के बाद पुलिस की मदद से सभी घायल शिक्षक और छात्रों को अस्पताल पहुंचाया गया।

बताया जा रहा है कि पोड़ी-उपरोड़ा में संचालित एकलव्य विद्यालय में पदस्थ 10 शिक्षक-शिक्षिका और 2 छात्र विंगर वेन से सुबह के वक्त रवाना हुए थे। विंगर वेन तानाखार मुख्य मार्ग के पास से गुजर रही थी, तभी दूसरी तरफ से आ रहे तेज रफ्तार माजदा ट्रक के चालक ने विंगर को चपेट में लेकर जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में माजदा की टक्कर से विंगर के परखच्चे उड़ गये।

जिससे उसमें सवार शिक्षक और छात्रों को गंभीर चोटे आई है। घटना की जानकारी मिलते ही डायल 112 की मदद से सभी घायलों को कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाकर भर्ती कराया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल 7 शिक्षकों को मेडिकल कालेज अस्पताल कोरबा रिफर किया गया है। जहां उपचार के दौरान दो शिक्षिका की मौत् हो गयी। मरने वाली महिला शिक्षक का नाम अंजना शर्मा और मंजू शर्मा बताया जा रहा है। वहीं घायल अन्य शिक्षकों का उपचार जारी है। पुलिस ने इस दुर्घटना पर अपराध दर्ज कर माजदा वाहन को जब्त कर लिया है।

CG – PWD अधिकारी के बेटे ने की आत्महत्या, कमरे में फांसी के फंदे से लटकी मिली लाश, मौत की वजह बनी पहेली…..

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में एक एग्रीकल्चर के छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। छात्र की लाश कमरे में फंदे से लटकते हुए मिली है। मामला सुपेला थाना क्षेत्र का है। मृतक छात्र की पहचान इंद्रप्रीत सिंह सैनी (26 साल) के रूप में हुई है। छात्र इंद्रप्रीत सिंह सैनी के पिता जनरल सिंह सैनी जगदलपुर में लोक निर्माण विभाग(PWD) में SDO हैं। जबकि मां सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। उसके दो छोटे भाई थे। इंद्रप्रीत भिलाई में रहकर एग्रीकल्चर की पढाई कर रहा था।

चुन्नी से लगाई फांसी

छात्र इंद्रप्रीत सिंह सैनी ने कातुलबोर्ड स्थित साईं नगर स्थित घर के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया। उसने चुन्नी से अपने कमरे में फांसी लगाई। उस वक्त वह घर पर अकेला था। माता-पिता और छोटा भाई किसी काम से बाहर गए हुय थे।

मामले की जानकारी मिलते ही सभी तुरंत घर पहुंचे. इसकी सूचना पुलिस को दी गयी। सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गयी। शव को फंदे से नीचे उतारकर लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया है।

परिजनों ने बताया वो शांत स्वभाव का व्यक्ति था। उन्हें किसी भी तरह की परेशानी के बारे में नहीं पता है। न ही कोई सुसाइड नोट मिला है। आत्महत्या की वजह अभी पता नहीं चल सकी है। पुलिस मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। जल्द ही आत्महत्या के कारणों पता लगा लिया जाएगा।

जो मनुष्य शरीर पाकर भी जीवात्मा का कल्याण नहीं करता है, वह बाद में पछताता है – बाबा उमाकान्त महाराज

जो मनुष्य शरीर पाकर भी जीवात्मा का कल्याण नहीं करता है, वह बाद में पछताता है – बाबा उमाकान्त महाराज

मौत के समय जब कर्मों का पर्दा हटता है तब जीव माफी मांगता है लेकिन तब तक माफी का वक्त खत्म हो जाता है

नवी मुंबई। बाबा उमाकान्त महाराज ने 22 जुलाई 2025 के सतसंग में कहा कि तीसरी आंख के सामने बहुत मोटे पर्दे लगे हुए हैं। किस चीज के पर्दे? यही जो चोरी की, लूटा-खसोटा, धोखा दिया, मारा-काटा, माँस-मछली खाई, अंडा खाए, शराब, ताड़ी, अफीम का सेवन किया और नशे में आ कर के व्यभिचार किया; यही सारा गलत काम करने लग गए तो इसी का पर्दा लगा रहता है, और कई जन्मों का पर्दा लगा रहता है। कर्मों का पर्दा तीन तरह से हटता है।

एक तो जब मौत आ जाती है, सामने खड़ी हो जाती है तब पर्दा हट जाता है, उस वक्त पर तो ज्ञान होने लगता है, जानकारी होने लगती है और जीव रोता-चिल्लाता है, माफी मांगता है लेकिन माफी का वक्त खत्म हो गया होता है। कर्मों का पर्दा जब बच्चा माँ के पेट में रहता है तब भी नहीं रहता है, तब भी पिछले जन्मों का असर दिखाई पड़ता है, पिछले जन्मों की याद आती है और एक साधना में पर्दा हटता है।

साधना शिविर जब लगी थी तब आपको बताया गया था कि कुछ लोगों का पर्दा हटा और कुछ लोगों की अंदर की आँख के सामने जो मोटा पर्दा था, उसमें कमी आई।

बुढ़ापे में भजन भाव-भक्ति नहीं हो पाती है।

कहा गया है – “यह तन कर फल विषय न भाई” विषय वासनाओं के लिए यह मनुष्य शरीर नहीं मिला है, यह साधना करने के लिए मिला है। यह साधना का घर है, पूजा का मंदिर है।

“साधन धाम मोक्ष कर द्वारा।
पाई न जेहिं परलोक सँवारा॥ ”

“सो परत्र दु:ख पावइ, सिर धुनि धुनि पछिताइ।
कालहि कर्महि ईस्वरहि मिथ्या दोष लगाइ।।”

जो मनुष्य शरीर पा करके परलोक में आना-जाना शुरू नहीं करता है, वह बाद में पछताता है। क्यों पछताता है? इसलिए कि उम्र आपको गिन कर के दी गई है। मान लो 50 साल, 60 साल की उम्र हो गई और यह जो दिन और रात आते हैं, यह उम्र को काट करके खत्म कर दे रहें हैं। अब मान लो बुढ़ापा आ गया, तो बुढ़ापे में कुछ हो पाता है ? कुछ नहीं हो पाता है। तमाम बुजुर्ग आपके घर में होंगे लेकिन बेचारे यहां सतसंग में नहीं आ पाए। तो जो कुछ भी होता है, जब शरीर में ताकत रहती है तभी हो पाता है।
इसीलिए बुजुर्ग लोग पछताते हैं बेचारे कि देखो अब हम क्या करें ? अब हम भजन भाव-भक्ति नहीं कर सकते, नाम का सुमिरन नहीं कर सकते, साधना शिविर में जा नहीं सकते हैं, साधना कर नहीं सकते हैं लेकिन “अब पछताए होत क्या” अब पछताने से क्या फायदा ? समय निकल गया।