छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ जनसंपर्क

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्र के प्रति समर्पण हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा : उप मुख्यमंत्री अरुण साव….

रायपुर: उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित व्याख्यान माला (छात्र सम्मेलन) को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अतुलनीय योगदान को लंबे समय तक भुलाने का प्रयास किया गया, जबकि उन्होंने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका जीवन प्रत्येक विद्यार्थी और युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बचपन से ही उनमें राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और शिक्षा के प्रति गहरा समर्पण था। कम आयु में ही वे विद्वान शिक्षाविद् बने और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने देशहित को सर्वोपरि मानते हुए हर चुनौती का साहसपूर्वक सामना किया।

श्री साव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विभाजन के समय प्रताड़ित और पीड़ित हिंदू परिवारों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। उन्होंने संयुक्त बंगाल के प्रस्ताव का दृढ़ता से विरोध किया, जिसके कारण आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने नई शिक्षा व्यवस्था में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपरा को स्थान देने की सोच भी बहुत पहले प्रस्तुत की थी, जो आज देश में नई शिक्षा नीति के माध्यम से साकार हुआ है।

श्री साव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अनुच्छेद-370 और कश्मीर में लागू परमिट प्रथा का खुलकर विरोध किया। उनका स्पष्ट संदेश था कि एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे। इसी संकल्प के साथ वे बिना अनुमति कश्मीर पहुंचे, जहां उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा गया। उन्होंने यातनाएं झेलीं, उचित उपचार नहीं मिला और अंततः राष्ट्र की एकता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका यह सर्वोच्च बलिदान भारत की एकता और अखंडता के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

छात्र सम्मेलन में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संघर्ष केवल उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके विचारों को साकार करने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से भारतीय संविधान की मुख्य धारा से जोड़ा। साथ ही नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक भारतीय नागरिकता प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और उनके संघर्ष को सच्ची श्रद्धांजलि है।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि आज भारत आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के जिस मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, उसकी मजबूत नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान राष्ट्रनायकों ने रखी थी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उनके राष्ट्रप्रेम, त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेकर भारत को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ललित प्रकाश पटैरिया, अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी भी छात्र सम्मेलन में शामिल हुए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button