छत्तीसगढ़

CG – प्रशासन के नाक के नीचे पाली में 1 करोड़ से अधिक के सीसी कांक्रीट सड़क का घटिया निर्माण बदस्तूर जारी, विकास के नाम पर सरकारी लूट को लेकर जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी…पढ़े पूरी ख़बर

0 बेखौफ होकर मनमाने भ्रष्ट्राचार को अंजाम दे रहा ठेकेदार.

0 आवश्यक जांच कर गुणवत्तापरख निर्माण की मांग

कोरबा//जिला प्रशासन के आंखों के सामने 1 करोड़ से अधिक के सीसी सड़क कागज पर मजबूत, जमीन पर खोखली बन रही है। पाली ब्लाक मुख्यालय से सटे ग्राम केराझरिया स्थित एफसीआई गोदाम के पास से छिंदपारा होते हुए नगर के मुख्यमार्ग को जोड़ने वाले 2 किलोमीटर की इस एप्रोच सड़क में ठेकेदार और विभागीय मिलीभगत से सरकारी खजाने की खुली लूट हो रही है, जिस पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कार्य की आवश्यक जांच कर गुणवत्तापरख निर्माण की मांग की है।

बारिश के मध्य चल रहे इस काम मे मानक नही, सिर्फ मनमानी चल रही है। सीसी रोड में अनिवार्य 43 ग्रेड ओपीसी की जगह 33 ग्रेड पीसीसी नुवोको व श्री सीमेंट निर्माण में लगाया जा रहा है, इसकी स्ट्रेंथ ही आधी है। वैध रेत की जगह आसपास के नदी- नालों से चोरी की अवैध रेत ट्रैक्टरों से लाकर डाली जा रही है, इससे सड़क के एक मानसून भी झेल पाने पर संशय है। नियम कहता है पहले 6 इंच मुरुम, इसके ऊपर रोलर, फिर कांक्रीट और इसके ऊपर वाइब्रेटर। लेकिन यहां सीधे कच्ची जमीन पर सड़क रूपी कांक्रीट बिछाया जा रहा है, जिसकी कोई बुनियाद ही नही।

दूसरी ओर 1 करोड़ से ऊपर के काम पर एक भी सूचना बोर्ड नही है, जनता को पता ही नही स्वीकृति कितनी, ठेकेदार कौन, निर्माण देखरेख का जिम्मा किसके भरोसे? वहीं ऐन बारिश में जल्दबाजी में निर्माण कराया जा रहा है, ताकि कोई झांकने न आ पाए और गड़बड़ी जारी रहे। आनन फानन में हो रहे इस निर्माण में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर घटिया सामाग्री के उपयोग को लेकर बीते दिनों *पाली में एक करोड़ प्लस की सीसी सड़क में अंधेरे वाला विकास : निम्न ग्रेड का सीमेंट, आसपास नदी- नालों से अवैध रेत का उपयोग…! न मुरुम न रोलर और न ही वाइब्रेटर मशीन का इस्तेमाल, निर्माण पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल?*

शीर्षक के साथ प्रमुखता से खबर प्रसारित करने के बाद भी संबंधित पीडब्ल्यूडी विभाग पूरी तरह मौन साधे बैठा है। विभाग द्वारा कोई निरीक्षण या रोक- टोक नजर नही आ रहा। इस घटिया निर्माण को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है और उनका कहना है कि यह विकास का नही, भ्रष्ट्राचार का सड़क बन रहा है। एक करोड़ से अधिक जनता का पैसा पानी मे बहाया जा रहा है।

ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी के मिलीभगत से निर्माण के नियम- कायदे को हासिये पर रखकर मनमानी को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है, यह नही चलेगा। जनप्रतिनिधियों की जिला प्रशासन से मांग है कि तुरंत घटिया निर्माण पर रोक लगाकर निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई करते हुए गुणवत्ता मानकों के साथ काम कराया जाए, ताकि 1 करोड़ से ऊपर की यह सड़क सालों- साल टिक सके। आगे देखने वाली बात है कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है?

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