छत्तीसगढ़

CG – मां की ममता अपार : न बछड़ा भूख भूल सका, न गाय ने ममता त्यागी…! वयस्क बछड़े को भी दूध पिलाती दिखी गौमाता बुजुर्गो की बात आई याद पढ़े पूरी ख़बर

कोरबा//एक दुबली- पतली गौमाता सड़क पर शांत भाव से खड़ी है और उसका वयस्क बछड़ा अब भी मां का दूध पी रहा है। बछड़ा अब छोटा नही रहा, कद- काठी से जवान लग रहा है। पर मां ने बड़ा हो गया है कहकर मुह नही मोड़ा।

मां के लिए उसका बछड़ा आज भी वही भूखा बच्चा है तथा सड़क पर गुजरते बड़े- छोटे वाहनों के खतरे के बीच अपनी ममता नही त्यागी। यही वो पल है जिसे देखकर बुजुर्गों की कही बात याद आ गई कि *”पुत्र कुपुत्र हो सकता है, लेकिन माता कुमाता नहीं।

यह तस्वीर पाली नगर के भीतर मुख्य सड़क पर अपने वयस्क बछड़े को दूध पिलाती खड़ी गौमाता की है। मार्ग पर छोटे- बड़े वाहन गुजर रहे थे पर गाय टस से मस नही हुई और उसने अपने बछड़े को दूध पिलाना जारी रखा।

मानो कह रही हो- दुनिया इधर से उधर हो जाए, मेरा बच्चा भूखा नही रहेगा। यह दृश्य हमे दो बातें सिखाता है, पहला परिस्थिति कितनी भी कठिन हो, एक मां अपने बच्चे को भूखा नही सोने देती। न डर न भूख, न थकान उसे रोक पाती है, और दूसरा गौमाता जिसे हम माता कहते हैं, आज भी सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं।

गौवंश संरक्षण के बड़े- बड़े दावे तो होते हैं लेकिन धरातल पर इसका शत प्रतिशत क्रियान्वयन नही हो पाता। तस्वीर देखकर स्थानीय लोगों ने कहा कि वर्तमान दौर में मतलबी बच्चें बड़े होकर अपने बूढ़े मां- बाप को भूल जाते हैं और ये देखो बछड़ा वयस्क होकर भी मां के पास है और मां भी उस वयस्क बछड़े पर ममता लुटाते हुए दूध पिलाना नही छोड़ रही।

आज सैकड़ों गाय- बछड़े कचरा और प्लास्टिक खाकर जी रहे हैं, हादसों का शिकार हो रहे हैं। सरकार गौ सेवा की योजना भी चला रही है, लेकिन गौमाता अक्सर सड़क पर ही नजर आती है। यह तस्वीर सिर्फ एक गाय और बछड़े की नही है, यह हम इंसानों के लिए आईना है। सवाल सीधा है- जब एक जानवर अपनी संतान का साथ आखिरी सांस तक नही छोड़ती, फिर हम रिश्तों को क्यों भूल जाते हैं?

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