छत्तीसगढ़

CG – विकास की राह ताकता खैरगड़ई गांव : 15 घरों के आदिवासी परिवार 21वीं सदी में भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहें जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

0 सरपंच- सचिव की अनदेखी, नेता- जनप्रतिनिधि चुनाव में आते हैं फिर ईद का चांद हो जाते हैं.

0 शुद्ध पेयजल, शिक्षा, सड़क की शासन- प्रशासन से अपेक्षित मांग.

कोरबा//आजादी के 78 साल बाद भी कोरबा जिले में एक ऐसा मोहल्ला है जो पीने का पानी, स्कूल- आंगनबाड़ी और पक्की सड़क जैसी बुनियादी रोशनी से वंचित है और जहां लगभग 15 घरों के आदिवासी परिवार बदहाली में जीवन जीने को मजबूर हैं।

जनपद पंचायत पाली अंतर्गत डोंड़की का आश्रित मोहल्ला खैरगड़ई की तस्वीर जिले के विकास को मुह चिढ़ा रहा है। इस मोहल्ले में एकमात्र हेंडपम्प ही जीवन रेखा है। पंचायत ने पिछले साल इसमें सबमर्सिबल पंप लगाया था, पर वो सिर्फ एक- डेढ़ माह चला और खराब हो गया। उसे निकालने के बाद आज तक दोबारा नही लगाया गया। तस्वीर में दिख रहा है कि बच्चें हाथ चलाकर पानी भरने को मजबूर हैं।

गर्मी में जब ये हेंडपम्प सूख जाता है तो ग्रामीणों को ढोढ़ी का गंदा पानी पीना पड़ता है। नहाने- धोने के लिए मोहल्ले में एक डबरी है, लेकिन उसमें पचरी तक नही है। निस्तारी के लिए ग्रामीणों को कीचड़ से जूझना पड़ता है। यहां न आंगनबाड़ी है, ना स्कूल। इससे मोहल्ले के एक दर्जन से ज्यादा नौनिहाल बच्चे अक्षरज्ञान से वंचित हैं और जो प्राथमिक स्कूल में पढ़ने जाते हैं, उन्हें डेढ़ किमी दूर देउरभांठा पैदल जाना पड़ता है। यहां के ग्रामीण यदि बरसाती मौसम में बीमार पड़ जाएं तो स्थिति और बद्तर हो जाती है।

तस्वीर में दिख रहा कीचड़ और गड्ढों से भरा कच्चा रास्ता बारिश में अवरुद्ध हो जाता है, तब एम्बुलेंस तो दूर पैदल भी निकलना मुश्किल हो जाता है। बारिश के दिनों में स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन सब बाधित हो जाता है। मोहल्ले में वर्तमान कुछ दूरी तक पक्की सड़क तो बन रही है लेकिन वह भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीण सड़क की गुणवत्ता को लेकर विरोध जता रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं ये भी कागजों तक ही सीमित न हो जाए। ग्रामीण शिवकुमार, समारसिंह, माखन, देवचरण सिंह, मुकेश, रामनाथ, मुखीराम का दर्द एक जैसा है।

उनका कहना है कि सरपंच को समस्या बताओ तो कोई जवाब नही मिलता। नेता- जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय आते हैं और विकास के बड़े- बड़े वादे करके जाते तो हैं, पर जीत के बाद वो भी ईद का चांद हो जाते हैं। उनकी बुनियादी समस्याएं और फरियाद पर अमल करने वाला कोई नही है।

वार्ड पंच श्रीमती मथुरा मरकाम का भी आरोप है कि खैरगड़ई को विकास के क्रम से जानबूझकर उपेक्षित रख दिया गया है, जिससे मोहल्ले के लोग मूलभूत अभावों में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं। ऐसे में खैरगड़ई की तस्वीर को देखकर यह कहना अनुचित न होगा कि सरपंच-सचिव की निष्क्रियता और नेताओं- जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण इस मोहल्ले तक शासन की अधिकतर विकास योजनाएं पहुँच नही पा रही है और 15 घरों के ग्रामीण परिवार 19वीं सदी के जीवन जीने को लाचार हैं। इस मोहल्ले के निवासियों का शासन- प्रशासन से अपेक्षित मांग है कि उनके मोहल्ले में शुद्ध पेयजल, शिक्षा, सड़क की आवश्यकता पर गंभीरता से ध्यान केंद्रित करते हुए विकास योजनाओं से जोड़ा जाए।

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