छत्तीसगढ़

CG – 34 किमी.का एनएच बन गया पऱ इंसान के लिए छांव नही डूमरकछार से मोहनपुर तक यात्री प्रतीक्षालय नही धूप-बारिश में खड़े होने को मजबूर यात्री पढ़े पूरी ख़बर

कोरबा/सड़क निर्माण कंपनी मेसर्स दिलीप बिल्डकॉन द्वारा पतरापाली (बगदेवा) से सुतर्रा तक 34 किलोमीटर लंबे नेशनल हाइवे- 130 का निर्माण कर आवागमन तो सुगम कर दिया, लेकिन इस विकास के बीच डूमरकछार से मोहनपुर (मदनपुर) 17 किलोमीटर के हिस्से में आम आदमी के लिए बुनियादी सुविधा ही गायब है और जिस दायरे में एनएच के दोनों ओर एक भी यात्री प्रतीक्षालय नही बनाया गया है।

डूमरकछार से लेकर मोहनपुर के मध्य रोजाना सैकड़ो यात्री, स्कूली छात्र- छात्राएं, बुजुर्ग और बीमार लोग सवारी वाहन का इंतजार करते हैं। ऐसे में बारिश हो तो भीगते हैं और यदि बादल गरजे तो बच्चे- बुजुर्ग जान बचाने इधर उधर भागते हैं। ज्यादातर स्कूली बच्चें बारिश से बचने पेड़ों का सहारा लेते हैं, जो आकाशीय बिजली के समय जानलेवा साबित हो सकता है। गर्मी में भी तेज धूप से बचने के लिए छांव तलाशनी पड़ती है। कई बार प्राथमिक स्तर के बच्चे सड़क किनारे पेड़ के नीचे बेसुध तक हो जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को होती है।

दुपहिया वाहन सवारों के लिए भी 17 किमी. तक सिर छिपाने की कोई जगह नही मिलती। एनएच- 130 निर्माण कंपनी ने नियम- कायदे ताक पर रख इस बुनियादी सुविधा की अनेदखी की है, जबकि सरकार द्वारा एनएचएआई और राज्य शासन के मापदंडों में स्पष्ट है कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के साथ- साथ निर्धारित दूरी पर यात्री प्रतीक्षालय, बस शेल्टर और मूलभूत जनसुविधाओं का निर्माण अनिवार्य है। जिसका उद्देश्य है सुगम आवागमन के साथ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा। लेकिन दिलीप बिल्डकॉन द्वारा डूमरकछार से मोहनपुर के 17 किमी. में जनसुविधा के नाम पर शून्य छोड़ दिया गया है।

यानी सड़क से समय की बचत तो मिली, किंतु धूप- बारिश का खामियाजा आज भी सवारी वाहनों का इंतजार करने वालों और दुपहिया सवारों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में क्या ठेके की शर्तों में यात्री सुविधाएं शामिल नही? या उसे जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?

यात्रियों, स्कूली छात्र- छात्राएं और दुपहिया वाहन सवारों का कहना है कि कम से कम 3- 4 महत्वपूर्ण स्थानों पर पक्के यात्री प्रतीक्षालय बनाए जाएं, ताकि इस मार्ग पर सफर करने वाले धूप- बारिश से बच सकें। एनएच- 130 विकास की मिशाल है, लेकिन डूमरकछार- मोहनपुर का 17 किमी. उसकी सबसे बड़ी खामी है। जब तक यहां छांव नही मिलेगी, तब तक ये सड़क अधूरी ही कहलाएगी। शासन- प्रशासन से मांग है कि नियमों के विपरीत नही हुए इस कार्य पर संज्ञान लेकर त्वरित यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कराया जाए। वरना एक दिन कोई हादसा इस अनदेखी की कीमत चुका देगा।

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