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छत्तीसगढ़

CG- चाकू की नोक पर दुष्कर्म : चाकू दिखाकर शिक्षिका को बनाया हवस का शिकार, 5 साल बाद कोर्ट ने सुनाई ये कठोर सजा

रायपुर। राजधानी रायपुर में टीचर से चाकू की नोक पर दुष्कर्म के करीब पांच साल पुराने मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक) विनय कुमार प्रधान की अदालत ने आरोपी बालकृष्ण जांगड़े को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर 1 लाख 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

वहीं, इस मामले में आरोपी की पत्नी अंजना जांगड़े को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक विजयश्री बिसेन ने पैरवी की।

यह मामला 15 मार्च 2021 का है। घटना के समय पीड़िता अपने दो बच्चों के साथ रायपुर के पिरदा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित घर में अकेली थी। उसके पति सुबह करीब 10 बजे कार्यालय के लिए निकल गए थे।

अभियोजन के मुताबिक, पति के घर से निकलने के कुछ देर बाद बालकृष्ण जांगड़े शादी का कार्ड देने के बहाने वहां पहुंचा। उसने खुद को पीड़िता के पति का दोस्त बताया और परिचित होने की बात कहकर घर के अंदर प्रवेश कर गया।

आरोप है कि घर में दाखिल होने के बाद आरोपी ने महिला के साथ मारपीट की और चाकू दिखाकर उसे डराया। इसके बाद उसने महिला को बंधक बना लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के दौरान महिला के दोनों बच्चे भी घर में मौजूद थे।

पीड़िता ने अदालत में दिए बयान में बताया कि आरोपी ने घर में घुसने के बाद उस पर चाकू से हमला किया। इसके बाद उसे बंधक बना लिया गया। महिला के मुताबिक, आरोपी की धमकी और हमले के कारण वह खुद को बचाने में असमर्थ थी।

घटना के दौरान उसके शरीर पर चोटें भी आईं। पीड़िता ने बताया कि वारदात के बाद उसने करीब 12:45 बजे अपने पति को फोन किया और घर में दो लोगों के घुसने तथा चाकू से हमला किए जाने की जानकारी दी।

सूचना मिलने के बाद पति तत्काल घर पहुंचे। वहां उन्होंने पत्नी को घायल हालत में पाया। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई और पुलिस ने जांच शुरू की।

मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल और अन्य पहलुओं की जांच की। संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए और उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने के बाद आरोप पत्र अदालत में पेश किया गया।

इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। करीब पांच साल तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान समेत मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बालकृष्ण जांगड़े को मामले में दोषी माना।

मामले में बालकृष्ण जांगड़े की पत्नी अंजना जांगड़े को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि, अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए। इसके चलते कोर्ट ने उसे दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने मुख्य आरोपी बालकृष्ण जांगड़े को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1 लाख 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

15 मार्च 2021 को हुई इस घटना के करीब पांच साल बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला आया है। अदालत के निर्णय के बाद बालकृष्ण जांगड़े को अब उम्रकैद की सजा जेल में काटनी होगी। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उसकी पत्नी अंजना जांगड़े को मामले में दोषमुक्त कर दिया गया है।

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक विजयश्री बिसेन ने पैरवी की।

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