CG – करोड़ों का परियोजना पुल बना, सड़क गायब…? कोरबा बिलासपुर के अनेकों ग्रामों को जोड़ने वाला ढुकुपथरा पंर्रापखना के मध्य डेढ़ किमी. मार्ग बदहाल परेशान हजारों ग्रामीण पढ़े पूरी ख़बर
0 प्रशासन सड़क बनवाए अन्यथा ग्रामीणों के साथ आवाज बुलंद करेंगे- सत्यनारायण पैकरा.
कोरबा//पुल तो पक्का बन गया साहब, लेकिन आवागमन वाले डेढ़ किलोमीटर का रास्ता आज भी कच्चा है, जो बरसात में खतरनाक हो जाता है..। ये दर्द है पाली विकासखण्ड के ग्राम ढुकुपथरा- पंर्रापखना के ग्रामीणों का। यहां साल 2020 में करोड़ो के स्वीकृत वृहद पुल सह सड़क निर्माण में पुल तो 2022 तक बनकर तैयार हो गया, किंतु उक्त परियोजना में शामिल डेढ़ किमी. का सड़क आज तलक कच्चा ही है और जो बारिश में कीचड़, दलदल एवं फिसलन भरा हो जाने से ग्रामीणों के लिए आफत हो जाता है।
ग्राम ढुकुपथरा- पंर्रापखना मार्ग पर गाजर नदी में वृहद पुल एवं पहुँचमार्ग निर्माण और इस परियोजना के लिए 0.766 हेक्टेयर भू- अर्जन सहित 439.42 लाख की स्वीकृति शासन से मिली तथा इस निर्माण सीमा में आने वाले किसानों की निजी भूमि अर्जन के लिए गत 29 अगस्त 2020 को कलेक्टर से अधिसूचना जारी हुई एवं 2022 तक विकास का प्रतीक वृहद पुल तो बनकर तैयार हो गया लेकिन डेढ़ किमी. का कच्चा मार्ग उसी विकास को 4 साल से मुह चिढ़ा रहा है। उक्त मार्ग बारिश के दिनों में कीचड़ और फिसलन भरा हो जाता है और स्कूली बच्चें आते- जाते फिसलकर गिरते हैं, बुजुर्ग लड़खड़ाते हैं व बीमारों को पाली ब्लाक मुख्यालय तक लाना आफत हो जाता है।
दुपहिया वाहन सवारों के लिए भी डेढ़ किमी. का कच्चा रास्ता जोखिम भरा होता है। बता दें कि ये मार्ग कोरबा जिले की अंतिम सीमा पर है और सीमावर्ती बिलासपुर जिले के अनेकों गांवों को कोरबा से जोड़ता है। जो बारहमासी आवागमन और ग्रामीणों के लिए शार्ट व मुख्यमार्ग है। लेकिन सड़क नही बनने से दर्जन भर गांव के हजारों ग्रामीण इस कच्ची सड़क पर जूझ रहे हैं। इससे तंग आकर ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन और सुशासन तिहार में भी आवेदन लगाए, किंतु प्रशासन का रवैया उदासीन रहा है। पंचायत द्वारा हर वर्ष इस कच्चे मार्ग का मरम्मत कराया जाता है, लेकिन जैसे ही बरसाती मौसम आया मार्ग की हालत जर्जर हो जाती है।
ग्रामीणों के इस समस्या को ब्लाक कांग्रेस कमेटी पाली के अध्यक्ष सत्यनारायण पैकरा ने लोक निर्माण विभाग अधिकारी के समक्ष रखा तो जवाब मिला कि सड़क निर्माण का जिम्मा सेतु निगम को सौंपा गया है। लेकिन सेतु निगम से कोई कारगर जवाब नही मिल पाया है। इसे लेकर सत्यनारायण पैकरा ने जिला प्रशासन से अपेक्षित मांग की है कि इस डेढ़ किमी. बदहाल मार्ग को शीघ्र प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से जोड़कर सड़क निर्माण कराया जाए, ताकि हजारों ग्रामीणों के आवागमन का यह मार्ग आसान हो सके। अपेक्षा है कि कागजों पर स्वीकृत योजना को जमीन पर उतारा जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि जल्द इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आवाज बुलंद की जाएगी। जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। बहरहाल डेढ़ किमी. के कच्चे मार्ग पर जब तक सड़क नही बनेगा, करोड़ो का पुल ग्रामीणों के लिए दूर का ढोल ही रहेगा।




