कलेक्टर के सख्त निर्देश: ई-ऑफिस,समयबद्ध निराकरण और अनुशासन पर जोर…अब असली परीक्षा तहसील-राजस्व के पुराने पंचर सिस्टम की।

कवर्धा/जिला कार्यालय में व्यवस्था सुधारने को लेकर कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने अधिकारियों-कर्मचारियों की बैठक लेकर ई-ऑफिस के माध्यम से शत-प्रतिशत कार्य संपादन,समय पर कार्यालय में उपस्थिति,लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण और राजस्व मामलों में समयबद्ध कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने सुबह 10 बजे बायोमैट्रिक उपस्थिति और शाम 5.30 बजे के बाद ही कार्यालय छोड़ने की हिदायत भी दी है।
लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि कलेक्टर के आदेश कागज से निकलकर जमीन तक कितनी तेजी से पहुंचेंगे?खासकर तहसील और राजस्व विभाग की वह कार्यप्रणाली,जिस पर लंबे समय से लंबित प्रकरणों,अभिलेखीय त्रुटियों और आम लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने जैसी शिकायतें उठती रही हैं,क्या वास्तव में बदलेगी?
कलेक्टर ने ई-ऑफिस में फाइलों को अनावश्यक लंबित नहीं रखने और डिजिटल प्रणाली के जरिए पारदर्शिता,गति एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राजस्व प्रकरणों,भू-अर्जन, स्वामित्व योजना,अभिलेख शुद्धता सहित विभिन्न मामलों के समयबद्ध निराकरण पर भी जोर दिया गया है।
अब निगाहें इसी पर रहेंगी कि नई व्यवस्था पुराने ढर्रे पर भारी पड़ती है या फिर आदेशों की फाइल भी उन्हीं लंबित फाइलों की कतार में शामिल हो जाती है।
बैठक में कर्मचारियों के मेडिकल, यात्रा भत्ता,अवकाश पंजी,स्थापना संबंधी प्रकरण,संजीवनी कोष, जनसंपर्क निधि,स्वेच्छा अनुदान और आरबीसी 6-4 जैसे मामलों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने तथा लंबित मामलों का नियमानुसार शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण की प्रगति की समीक्षा करते हुए मैदानी अमले को सक्रियता से कार्य करने और सही जानकारी समय पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।वहीं लिपिकों को डिजिटल सिग्नेचर वितरित कर ई-ऑफिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
फर्नीचर से लेकर फाइलों तक व्यवस्था सुधारने के निर्देश तो मिल गए,अब सवाल सिर्फ इतना है—क्या तहसील और राजस्व का वर्षों पुराना ..पंचर सिस्टम…सच में दौड़ेगा,या फिर नए आदेश भी पुराने ढर्रे की धूल में दबकर रह जाएंगे?



