छत्तीसगढ़

CG – मधुमेह का उत्तम इलाज प्रज्ञा संजीवनी में आयुर्वेद से लौट रही है मरीजों की खोई ऊर्जा इंसुलिन पर निर्भर मरीज भी हो रहें सामान्य पढ़े पुरी ख़बर

कोरबा//एक जमाना था जब मधुमेह को रईसों की बीमारी कहा जाता था, लेकिन अनियमित दिनचर्या, फास्ट फूड और तनाव भरे जीवन ने इसे आम बना दिया है। चिंता की बात यह है कि अब 20- 25 साल के युवा भी तेजी से डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। एलोपैथिक दवाइयों में मधुमेह को नियंत्रित रखने की क्षमता है, लेकिन अक्सर लंबे समय तक दवा और इंसुलिन लेने से शरीर में अन्य परेशानियां शुरू हो जाती हैं। वहीं आयुर्वेद इस बीमारी को जड़ से सुधारने और शरीर में हुई क्षति की पूर्ति करने की दिशा में कारगर साबित हो रहा है।

इसका जीवंत उदाहरण बना है पाली नया बस स्टैंड में संचालित आयुर्वेद औषधालय- प्रज्ञा संजीवनी। जहां दिव्य जड़ी- बूटी, वनौषधि और भस्म से निर्मित औषधियों के उपयोग से ऐसे अनगिनत मधुमेह रोगी आज सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जो पहले इंसुलिन और एलोपैथिक दवाओं पर निर्भर थे। मरीजों का कहना है कि आयुर्वेद औषधियों के सेवन से न केवल शुगर लेवल में अप्रत्याशित सुधार आया, बल्कि शरीर की शिथिल पड़ी ऊर्जा में भी नई स्फूर्ति आई और दिनचर्या की क्षमता बढ़ी है। मधुमेह बीमारी को लेकर प्रज्ञा संजीवनी के नाड़ी वैद्य रामफल पटेल (शांतिकुंज हरिद्वार एवं आयुष से प्रशिक्षित) बताते हैं कि आयुर्वेद मधुमेह को सिर्फ कंट्रोल नहीं करता, बल्कि इसके मूल कारण पर काम करता है तथा आयुर्वेद उपचार में मधुमेह को रिकवर करने के साथ- साथ शरीर में इस बीमारी से हुई क्षति की पूर्ति करने की भी क्षमता है।

लेकिन इसके लिए मरीज को आयुर्वेद पर भरोसा कर अपनी दिनचर्या और खानपान में अनुशासन लाना होगा, तभी औषधियां जड़ पर असर कर पाएंगी। वैद्य रामफल पटेल के अनुसार आयुर्वेद औषधियों के सेवन के दौरान शुरुआती महीनों में परहेज और दिनचर्या सबसे महत्वपूर्ण है। इनमें मिठाई, मीठे पेय पदार्थ, मैदा, जंकफूड, अधिक नमक, तंबाकू और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं।

मधुमेह पीड़ित अपनी दिनचर्या में हरी सब्जियां, साबुत अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, गेहूं, रागी की रोटी, दालें, अंकुरित अनाज और सीमित मात्रा में फलों का सेवन करें। तेल का प्रयोग कम से कम करें। रोजाना सुबह 1 से 2 किलोमीटर पैदल सैर, योग- प्राणायाम, समय पर भोजन और पर्याप्त नींद लेना अति आवश्यक है। वैद्य पटेल का कथन है कि यदि मरीज इन नियमों का पालन करता है तो कुछ ही महीनों में न केवल मधुमेह में काफी हद तक सुधार आता है, बल्कि शारीरिक क्षमता भी लौट आती है और व्यक्ति सामान्य जीवन जीने लगता है।

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