छत्तीसगढ़बेमेतरा जिला

₹41,750 करोड़ के AI डेटा सेंटर निवेश पर कांग्रेस नेत्री योगिता साहू ने उठाए गंभीर सवाल

बोलीं— विकास जरूरी है, लेकिन जनता, पानी, बिजली और पर्यावरण की कीमत पर नहीं100 MW के डेटा सेंटर को बिजली और प्रतिवर्ष करीब 358 अरब लीटर पानी की जरूरत

₹41,750 करोड़ के AI डेटा सेंटर निवेश पर कांग्रेस नेत्री योगिता साहू ने उठाए गंभीर सवाल…बोलीं— विकास जरूरी है, लेकिन जनता, पानी, बिजली और पर्यावरण की कीमत पर नहीं100 MW के डेटा सेंटर को बिजली और प्रतिवर्ष करीब 358 अरब लीटर पानी की जरूरत

संजू जैन जिला संवाददाता
बेमेतरा :7000885784

/बेमेतरा। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित ₹41,750 करोड़ के AI-रेडी डेटा सेंटर निवेश को लेकर कांग्रेस नेत्री योगिता साहू ने राज्य सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे हैं। सिंगापुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में Energy Capital Global की ओर से 100 मेगावाट के AI-रेडी डेटा सेंटर कैंपस के लिए ₹41,750 करोड़ के निवेश प्रस्ताव की जानकारी सामने आने के बाद योगिता साहू ने सरकार से इस परियोजना की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।उन्होंने कहा पहले बुनियादी सुविधाएं मजबूत हों, फिर बड़े निवेश की बात कांग्रेस नेत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज भी कई क्षेत्रों में सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की समस्याएं सामने आती रहती हैं। ऐसे समय में हजारों करोड़ रुपये के बड़े निवेश प्रस्तावों के साथ सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आम जनता की मूलभूत जरूरतों को मजबूत करने के लिए क्या प्राथमिकता तय की गई हैकांग्रेस नेत्री योगिता साहू ने कहा कि कांग्रेस आधुनिक तकनीक और AI के विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसका असर राज्य के बिजली, पानी, जमीन, पर्यावरण और रोजगार पर कितना पड़ेगा।उन्होंने सवाल उठाया कि 100 MW के डेटा सेंटर को बिजली कौन देगा? इसकी वास्तविक बिजली खपत कितनी होगी और बिजली का स्रोत क्या होगा? क्या इसके कारण राज्य के मौजूदा बिजली संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा या परियोजना के लिए अलग से बिजली व्यवस्था की जाएगी?

पानी की खपत पर सरकार दे स्पष्ट जवाबयोगिता साहू ने कहा कि डेटा सेंटर में cooling system के लिए पानी की जरूरत तकनीक के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। इसलिए सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्तावित AI डेटा सेंटर में कौन-सी cooling technology इस्तेमाल की जाएगी।उन्होंने कहा कि यदि परियोजना के लिए प्रतिवर्ष करीब 358 अरब लीटर पानी की जरूरत का कोई अनुमान सामने आ रहा है, तो सरकार को इसका आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया—
“पानी कहां से आएगा? प्रतिदिन कितनी पानी की खपत होगी? कितना पानी recycle किया जाएगा और स्थानीय जलस्रोतों पर इसका क्या असर पड़ेगा?”योगिता साहू ने कहा कि दुनिया के कई देशों और क्षेत्रों में डेटा सेंटर की बढ़ती बिजली और पानी की जरूरत को देखते हुए पर्यावरणीय मानकों, पानी के इस्तेमाल और ऊर्जा खपत को लेकर कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। ऐसे में भारत और छत्तीसगढ़ में भी किसी बड़े AI डेटा सेंटर को मंजूरी देने से पहले इन पहलुओं पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

विदेशों में संसाधनों को लेकर कड़े नियम, फिर छत्तीसगढ़ में क्या तैयारी?योगिता साहू ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में डेटा सेंटर के कारण बढ़ती बिजली और पानी की मांग को लेकर सरकारों ने सख्त पर्यावरणीय और संसाधन संबंधी नियम बनाए हैं। कुछ स्थानों पर पानी और बिजली की उपलब्धता को देखते हुए नई परियोजनाओं पर सीमाएं या अतिरिक्त शर्तें लगाई गई हैं।

उन्होंने कहा—
“जब दुनिया के कई देश पानी और बिजली की उपलब्धता को देखते हुए डेटा सेंटर परियोजनाओं पर कड़े नियम और नियंत्रण लागू कर रहे हैं, तो भारत और खासकर छत्तीसगढ़ में इतनी बड़ी परियोजना के लिए सरकार की क्या तैयारी है? जनता को इसका जवाब मिलना चाहिए।”

₹41,750 करोड़ का निवेश, लेकिन छत्तीसगढ़ के युवाओं को कितनी नौकरी?योगिता साहू ने कहा कि ₹41,750 करोड़ का निवेश निश्चित रूप से बड़ा आंकड़ा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इससे कितना स्थायी रोजगार पैदा होगा।

उन्होंने सरकार से पूछा—

– कुल कितनी नौकरियां पैदा होंगी?
– इनमें कितनी स्थायी नौकरियां होंगी?
– छत्तीसगढ़ के कितने युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलेगी?
– कितने स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा?
– परियोजना शुरू होने के बाद स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का स्पष्ट लक्ष्य क्या होगा?

उन्होंने कहा कि केवल निवेश का आंकड़ा बताना पर्याप्त नहीं है। सरकार को रोजगार का स्पष्ट रोडमैप भी जनता के सामने रखना चाहिए।

कितने पेड़ कटेंगे, कितनी जमीन लगेगी?

योगिता साहू ने कहा कि इतने बड़े डेटा सेंटर कैंपस के लिए जमीन और बड़े स्तर पर infrastructure की जरूरत होगी। इसलिए सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना के लिए कितनी जमीन ली जाएगी, उस जमीन पर कितने पेड़ मौजूद हैं और कितने पेड़ों की कटाई संभावित है।

यदि पेड़ों की कटाई होती है तो compensatory plantation की योजना क्या होगी और पर्यावरण पर परियोजना के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किस संस्था द्वारा किया जाएगा, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

“असली कीमत कौन चुकाएगा?”

कांग्रेस नेत्री योगिता साहू ने कहा कि सरकार को सिर्फ ₹41,750 करोड़ के निवेश का आंकड़ा बताने के बजाय परियोजना की पूरी आर्थिक तस्वीर जनता के सामने रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा—

“100 MW के डेटा सेंटर की बिजली कौन देगा? पानी कहां से आएगा? नौकरी कितनी मिलेगी? कितने पेड़ कटेंगे? कितनी जमीन जाएगी? सड़क और दूसरी सुविधाओं पर कितना सरकारी पैसा लगेगा? और आखिर इस पूरे प्रोजेक्ट की असली कीमत कौन चुकाएगा?”

उन्होंने कहा कि यदि परियोजना के लिए बिजली, पानी, सड़क, जमीन या अन्य infrastructure पर सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल होता है तो उसकी पूरी जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

DPR और पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

योगिता साहू ने राज्य सरकार से मांग की कि परियोजना की—

– Detailed Project Report (DPR)
– निवेश की शर्तें
– जमीन की आवश्यकता
– बिजली की वास्तविक आवश्यकता
– पानी की अनुमानित खपत
– रोजगार का लक्ष्य
– cooling technology
– पर्यावरणीय प्रभाव
– सरकारी संसाधनों पर संभावित खर्च

जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक की जाएं।

उन्होंने परियोजना शुरू होने से पहले स्वतंत्र पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव आकलन कराने तथा स्थानीय लोगों की राय के लिए आवश्यक सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की।

योगिता साहू ने कहा—

“हम AI और आधुनिक तकनीक के विरोधी नहीं हैं। लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें छत्तीसगढ़ की जनता, हमारे प्राकृतिक संसाधन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के हित सुरक्षित रहें। जनता को सिर्फ यह नहीं जानना है कि ₹41,750 करोड़ का निवेश आ रहा है, जनता यह भी जानना चाहती है कि इस निवेश से छत्तीसगढ़ को क्या मिलेगा और इसके बदले छत्तीसगढ़ को क्या कीमत चुकानी पड़ेगी।”

कांग्रेस नेत्री योगिता साहू ने राज्य सरकार से इस पूरे प्रोजेक्ट पर White Paper जारी कर बिजली, पानी, जमीन, रोजगार, पर्यावरण और सरकारी संसाधनों से जुड़ी सभी जानकारियां तथ्य और आंकड़ों के साथ जनता के सामने रखने की मांग की।

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