धमतरी

धमतरी में पटवारियों की हड़ताल पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, दो पटवारी निलंबित,कई को कारण बताओ नोटिस, 148 पटवारी अब भी हड़ताल पर..!

धमतरी। छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच अब प्रशासन और पटवारी संघ के बीच टकराव तेज होता नजर आ रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 13 अक्टूबर से हड़ताल पर बैठे पटवारियों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। धमतरी जिले में दो पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि कई अन्य पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस कार्रवाई के बाद पटवारी संघ का आक्रोश और बढ़ गया है।

दो पटवारी निलंबित, अधिकारियों पर भी कार्रवाई

प्रशासनिक कार्रवाई के तहत नगरी और मगरलोड क्षेत्र के दो पटवारियों को निलंबित किया गया है। नगरी एसडीएम ने पटवारी चिम्मन लाल ध्रुव, हल्का पांवद्वार को निलंबित किया है। बताया गया कि समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब नहीं मिलने के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1966 के नियम 9 के तहत एकपक्षीय कार्रवाई की गई।

वहीं, मगरलोड तहसीलदार ने चेतन्य नेताम, मुख्यालय बेलोरा को निलंबित कर दिया है।

148 पटवारी हड़ताल पर, कामकाज प्रभावित

राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले जिले के लगभग 148 पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिले में कुल 168 पटवारियों के कार्यरत होने की जानकारी दी गई है, जिनमें 20 प्रशिक्षु पटवारी हड़ताल में शामिल नहीं हैं। हड़ताल के चलते राजस्व विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

नोटिस के बाद भी पीछे हटने को तैयार नहीं पटवारी संघ

धमतरी, नगरी, मगरलोड, भखारा और कुरुद क्षेत्र के पटवारियों को प्रशासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में 48 घंटे के भीतर उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। वहीं, कई स्थानों पर आक्रोशित पटवारियों द्वारा नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध जताने की बात भी सामने आई है।

 पदोन्नति और लंबित मांगों को लेकर नाराजगी

पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष वासुदेव भोई का कहना है कि सरकार और प्रशासन की ओर से दबाव बनाने, निलंबन करने और नोटिस जारी करने के बावजूद पटवारी अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पदोन्नति में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद पटवारियों को उनका अधिकार नहीं मिल रहा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पटवारी बलदेव सिंह ठाकुर 37 वर्ष 7 माह की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिली।

एक तरफ पटवारी संघ अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दे रहा है, तो दूसरी तरफ प्रशासन ने काम पर वापस लौटने और जवाब प्रस्तुत करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। ऐसे में जिले में राजस्व कार्यों पर पड़ रहे असर के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और पटवारी संघ के बीच कोई समाधान निकल पाएगा या यह टकराव और लंबा खिंचेगा?

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