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प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री के संकल्प से बस्तर में बदलाव की नई इबारत लिखी जा रही है: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय….

रायपुर: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में अपने उद्बोधन के दौरान विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला माना जाता था, आज वह पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से जाना जा रहा है। विकास की धारा अब बस्तर के गांव-गांव तक पहुंच रही है। कई ऐसे गांव हैं जहां पहली बार बस सेवा शुरू हुई और पूरे गांव ने इसे उत्सव की तरह मनाया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब कुछ जिलों को पिछड़ा मानकर छोड़ दिया गया था।

वहां रहने वाले करोड़ों लोगों की मौलिक आवश्यकताओं तक को नकार दिया गया था और उन्हें उसी अवस्था में जीने के लिए मजबूर कर दिया गया। इन क्षेत्रों में विकास के अभाव ने हालात को और बदतर बना दिया था। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि ऐसे जिलों को पनिशमेंट पोस्टिंग के लिए उपयुक्त माना जाने लगा था, जिससे वहां की व्यवस्था और अधिक बिगड़ती चली गई। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस सोच और संस्कृति को बदला गया। यह निर्णय लिया गया कि पिछड़े क्षेत्रों में योग्य, युवा और होनहार अधिकारियों को तैनात किया जाएगा और उन्हें पूरे तीन वर्ष का समय दिया जाएगा, ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। एक के बाद एक ठोस निर्णय लिए गए और आज उनके परिणाम देश देख रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज संसद में प्रधानमंत्री के बस्तर में हुए विकास पर दिए गए वक्तव्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है। यह क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। यहां अनेक सुंदर जलप्रपात हैं, कुटुमसर जैसी विश्वविख्यात गुफा है, विशाल अबूझमाड़ का जंगल है और धुड़मारास गांव को विश्व पर्यटन संस्था द्वारा चयनित 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्रामों में स्थान मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण विकास इस पूरे क्षेत्र को छू नहीं पाया, जबकि बस्तर का क्षेत्रफल केरल राज्य से भी बड़ा है। अब स्थिति तेजी से बदल रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और विकास ने नई गति पकड़ी है। उन्होंने कहा कि इसी विश्वास और उत्साह का परिणाम है कि बस्तर ओलंपिक का आयोजन पिछले वर्ष से किया जा रहा है। पिछले वर्ष इसमें 1 करोड़ 65 लाख युवाओं की भागीदारी रही, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ 91 लाख तक पहुंच गई है। इसी तरह बस्तर पंडुम का आयोजन भी पिछले वर्ष किया गया और इस वर्ष भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 तारीख को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से होगा, जबकि समापन 9 तारीख को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी कई बार बस्तर और बस्तर ओलंपिक का उल्लेख किया जाना पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और संभावनाओं का प्रतीक बन रहा है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि नीति, नीयत और नेतृत्व सही हो, तो दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता है।

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