छत्तीसगढ़

CG – उपेक्षा का शिकार : 50 साल पहले जिस भवन में संचालित होता था हाईस्कूल 20 वर्ष से उसमें चल रहा पंचायत कार्यालय खनिज राजस्व में धनी जिले के ग्रामीण विकास दावों की हकीकत पढ़े पूरी ख़बर

0 जिला पंचायत अध्यक्ष ने कलेक्टर का कराया ध्यान आकृष्ट.

*कोरबा//जिले के ग्रामीण विकास की एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है, जहां पंचायत का कार्यालय 50 साल पहले संचालित एक हाईस्कूल भवन में लगाई जा रही है, और जहां पंचायत की बैठक या ग्राम सभा का आयोजन साप्ताहित बाजार चबूतरा में किया जाता है। यह खनिज राजस्व मामले में प्रदेश के सबसे धनी जिले के ग्रामीण विकास दावों की कड़वी और बेहद शर्मिंदा करने वाली सच्चाई है, कि विकास की नींव माने जाने वाले पंचायत की यह दशा है।

जिले के पाली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बकसाही का आज हम एक ऐसी तस्वीर आपको दिखाने जा रहे है, जो सिस्टम की पोल खोलकर रख देगी। दरअसल अपने गांव में विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन करने के लिए संचालित बकसाही ग्राम पंचायत वर्षों से खुद के भवन सुविधा से वंचित है। जनपद मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर इस ग्राम में 20 वर्ष पूर्व से जो पंचायत कार्यालय का संचालन हो रहा है, 50 साल पहले इस भवन में हाईस्कूल संचालित होता था। लगभग 4500 जनसंख्या एवं 2500 मतदाता संख्या वाले इस पंचायत के पास योजनाओं के संचालन हेतु खुद का भवन नही है। बतौर उधार संचालित पांच दशक पूर्व निर्मित यह पुराना भवन अंदर से बेहद जर्जर हो चुका है, जिसे पंचायत ने स्वयं असुरक्षित घोषित कर दिया था, लेकिन समय- समय पर मरम्मत के कारण यह भवन टिका हुआ है। जहां मजबूरीवश पंचायत कामकाज अस्थायी व्यवस्था के सहारे निपटाया जा रहा है, जबकि समस्या का स्थायी समाधान आज तलक नही निकल पाया। पंचायत वर्तमान सरपंच श्रीमती नूतन राज ने बताई कि 50 साल पूर्व निर्मित भवन की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। नए पंचायत भवन के लिए काफी पहले से भूमि भी चिन्हांकित हो चुकी है और सभी आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी कर प्रस्ताव बनाकर संबंधितों को अनेकों बार भेजा भी गया, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी कई बार आवेदन- निवेदन कर अवगत कराया गया है, बावजूद इसके अभी तक नए पंचायत भवन की स्वीकृति नही मिलना सोचनीय पहलू है। सरपंच ने आगे बताया कि विपरीत परिस्थितियों में हम काम कर रहे है और गुणवत्तापरख विकास देने की कोशिश कर रहे है, लेकिन वैकल्पिक पंचायत भवन में बैठकर कामकाज की समस्या बनी हुई है। जब पंचायत की बैठक अथवा ग्राम सभा का आयोजन किया जाता है तब समीप के साप्ताहिक बाजार स्थित चबूतरे का सहारा लिया जाता है, क्योंकि उधार के छोटे से पंचायत भवन में 10 लोगों के बैठने की भी जगह नही है। ऐसे में गांवों के विकास की धुरी मानी जाने वाले पंचायत का खुद अपने भवन के लिए उपेक्षित रहना ग्रामीण व्यवस्था की एक दुर्भाग्यजनक पहलू और प्रशासनिक सुस्ती को उजागर करता है। बहरहाल जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने ग्रामीणों की इस महत्त्वपूर्ण मांग से कलेक्टर कुणाल दुदावत को अवगत कराया है और बकसाही में नए पंचायत भवन स्वीकृत किये जाने मांग भी रखी है। अब पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही स्वीकृति मिलकर बकसाही पंचायत को अपना नया भवन नसीब होगा।

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