मेरी कुलदेवी मैया (चैत्र नवरात्र विशेष) : मैं लेखिका बनी हूँ, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय माँ महामाया को जाता है। उन्होंने ही मुझे प्रेरणा दी : शिखा गोस्वामी

मेरी कुलदेवी मैया (चैत्र नवरात्र विशेष)
नया भारत डेस्क। मेरी कुलदेवी, माँ महामाया, की कृपा से मेरा मन सदैव ज्योतिर्मय रहता है। अगर आज मैं लेखिका बनी हूँ, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय माँ महामाया को जाता है। उन्होंने ही मुझे प्रेरणा दी, इसलिए आज मैं कुछ न होते हुए भी बहुत कुछ हूँ। महामाया मंदिर मारोगढ़ छत्तीसगढ़ के प्रमुख और आस्था से परिपूर्ण मंदिरों में से एक माना जाता है। जनश्रुति है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण राजा मानसिंह द्वारा करवाया गया था, जो उस समय के प्रतिष्ठित शासक थे।
माँ महामाया की मूर्ति अत्यंत जीवंत और दिव्य है। उनके दर्शन करते ही ऐसा अनुभव होता है मानो वे साक्षात हमें देख रही हों। जब भी मैं मंदिर जाती हूँ, कुछ समय शांत बैठकर उन्हें निहारती हूँ, और फिर मन ही मन उनसे बातें करने लगती हूँ। उस क्षण ऐसा प्रतीत होता है जैसे माँ स्वयं मुझसे संवाद कर रही हों—मुझे संबल दे रही हों, मेरे दुख हर रही हों, और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही हों।
मंदिर का प्रांगण अत्यंत शांत, पवित्र और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। वहाँ बैठकर मन को एक अद्भुत शांति और आनंद की अनुभूति होती है। माँ का स्वरूप अत्यंत मनोहारी है—वे लाल साड़ी और चुनरी में सुसज्जित रहती हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, माथे पर लाल बिंदी, कमर में करधनी, पैरों में पायल, हाथों में चूड़ियाँ, कानों में कुंडल, और मांग में सुंदर मांगटीका उनकी दिव्यता को और बढ़ाते हैं। उनके केशों में सजा गजरा और गले में मंगलसूत्र सहित अन्य आभूषण उनकी शोभा को अलौकिक बना देते हैं। प्रतिदिन नए-नए फूलों की मालाओं से उनका श्रृंगार किया जाता है।
माँ महामाया के साथ ही वहाँ माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की प्रतिमाएँ भी विराजमान हैं, जो समृद्धि, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक हैं।
विशेषकर नवरात्रि के समय इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। दूर-दूर से श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं के लिए ज्योति कलश स्थापित करते हैं और पूरे नौ दिनों तक श्रद्धा, भक्ति और सेवा में लीन रहते हैं। उन दिनों मंदिर का वातावरण इतना दिव्य और आलोकित हो जाता है कि ऐसा लगता है मानो स्वर्ग धरती पर उतर आया हो।
मेरे लिए यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था, शांति और माँ के स्नेह का जीवंत अनुभव है। यहाँ आकर हर बार आत्मा को नई ऊर्जा और विश्वास मिलता है।
आपकी छत्रछाया में पल्लवित, सुरभित
आपकी शिखा