CG – मस्तूरी के DAV स्कूल में राजनीति हावी नेताओं के इंतजार में नहीं मिल रहा RTE में पढ़ने वाले गरीब बच्चों कों बुक क्या कहती हैँ प्रिंसिपल जानें पढ़े पूरी ख़बर
मस्तूरी//अच्छी राजनीति कें कई फायदे भी हैँ और कई नुकसान भी अच्छी राजनीति से पिछड़ा हिस्सा और क्षेत्र प्रगति की पथ पर लौट आती हैँ और गलत और उलटी राजनीति से बर्बादी भी तय होती हैँ पर अब कुछ ऐसा हो रहा हैँ जिसको सुन कर आपको भी यकीन नहीं होगा दरअसल मस्तूरी परसदा वेद के DAV स्कूल में इन दिनों प्रबंधन की हिटलर साही चल रही हैँ इनके द्वारा पहले स्कूल के वाट्सऐप ग्रुप पर बुक की लिस्ट जारी की जाती हैँ और कहा जाता हैँ की यह बुक स्कूल से लें सकते हैँ पर जब पेरेंट्स पहुंचते हैँ तो कुछ कों बुक दिए जाते हैँ और कुछ कों वापस भेज दिया जाता हैँ और जवाब दिया जाता हैँ की RTE में पढ़ने वाले बच्चों कों एक साथ नेताओं के हाथों से बुक का वितरण किया जाएगा।
अब सवाल ये हैँ की क्या शिक्षा के मंदिर स्कूल में राजनीति सहीं हैँ? और ज़ब आपको यह सब नेताओं से हीं कराना हैँ तो उन गरीब पेरेंट्स कों सुचना देना बनता हैँ की नहीं जो रोज अपनी मेहनत कर पेट भर रहें हैँ ये वो गरीब हैँ जो रोज कमाते हैँ रोज खाते हैँ जिनका बच्चा RTE के माध्यम से पढ़ाई कर रहें हैँ इनका खर्चा भी सरकार हीं उठा रही हैँ यह बात सब जानते हैँ फिर भी जो पेरेंट्स अपना काम धाम छोड़ कर स्कूल पहुंच रहें हैँ उनको यह कह कर वापस भेज देना की RTE वालों कों बुक नेताओं के हाथों से बांटा जाएगा यह कहाँ तक सही हैँ? क्या गरीब परिवार स्कूल का चक्कर काटता रहेगा और उनके बच्चे तब तक क्या पढ़ेंगे?
क्या नेता गिरी कों बढ़ावा देनें के लिए बच्चों का भविष्य भी दांव में लगा सकते हैँ स्कूल प्रबंधक,ज़ब स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई शुरू हो गयी हैँ तो आखिर कब तक जनप्रतिनिधियों के इंतजार में बुक वितरण का बच्चो कें पालक और बच्चे वेट करेंगे, या इन पेरेंट्स कों सिर्फ गरीब होनें या इनके बच्चों कों RTE में पढ़ने की सजा मिल रही हैँ या स्कूल प्रबंधन और यहाँ के कर्ता धर्ता अपनी इमेज नेताओं में चमकाने और क्रेडिट लेने के लिए ऐसा कर रहें हैँ।
क्या कहती हैँ प्रिंसिपल..
मस्तूरी डी.ए.वीं.स्कूल की प्रिंसिपल श्वेता श्रीवास्तव कहती हैँ की वो आज मीटिंग में हैँ और RTE में पढ़ने वाले बच्चों का बुक एक साथ जनप्रतिनिधियों के हाथों वितरण कराएँगे और नोडल अधिकारी कों भी दिखाना पड़ता हैँ और हमारे पास भी प्रूफ रहना चाहिए इसलिए,कोरोना काल से पहले भी ऐसा करते थे।
RTE में पढ़ने वाले बच्चों कों क्या क्या सुविधाएं मिलनी चाहिए..
RTE (शिक्षा का अधिकार) के तहत निजी स्कूलों में 25% सीटों पर गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को कक्षा 1 से 8 (या कुछ राज्यों में 12वीं) तक निःशुल्क शिक्षा मिलती है। इसमें ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ होती है, साथ ही पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और लेखन सामग्री जैसी शैक्षणिक सामग्री भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, किन्तु मस्तूरी परसदा वेद के DAV स्कूल में RTE में पढ़ने वाले बच्चों से बुक का भी पैसा लिया जाता हैँ ड्रेस का भी और 4 साल में एक बार लगभग 6 सौ रुपए का सिर्फ एक चेक यहाँ पालकों कों दिया गया।




