CG – बैंकों की लापरवाही से बेरोजगार युवा परेशान – लोन प्रक्रिया में भटकाव और अनुचित निरस्तीकरण बंद किया जाए : सतीश वानखेड़े

बैंकों की लापरवाही से बेरोजगार युवा परेशान – लोन प्रक्रिया में भटकाव और अनुचित निरस्तीकरण बंद किया जाए : सतीश वानखेड़े
जगदलपुर। जिला बस्तर जगदलपुर में बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार हेतु विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बैंक लोन दिलाने के लिए जिला व्यापार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पात्र युवाओं की फाइलें पूरी जांच और आवश्यक दस्तावेजों के साथ बैंकों में भेजी जाती हैं, ताकि वे अपना रोजगार शुरू कर सकें।
किन्तु यह अत्यंत गंभीर और दुखद स्थिति है कि जिला व्यापार द्वारा भेजी गई फाइलें बैंकों में पहुंचने के बाद लंबे समय तक बिना किसी कार्रवाई के पड़ी रहती हैं। फाइलों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता और उन्हें एक तरह से नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसके बाद बिना ठोस कारण के उन फाइलों को रिजेक्ट कर दिया जाता है, जो कि पूरी तरह अनुचित है।
साथ ही, कभी फाइल एक बैंक में भेजी जाती है तो कभी दूसरे बैंक में, जिससे बेरोजगार युवाओं को बार-बार इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी साफ दिखाई देती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई बेरोजगार युवा पहले अपने स्तर पर कर्ज लेकर या उधारी करके दुकान या व्यवसाय शुरू कर देते हैं, इस उम्मीद में कि उन्हें बाद में बैंक से लोन मिल जाएगा। जिला व्यापार द्वारा उनकी फाइलें भी पास कर दी जाती हैं, लेकिन जब वही युवा लोन के लिए बैंक पहुंचते हैं तो उनकी फाइलें बिना उचित कारण के रिजेक्ट कर दी जाती हैं या बाद में “कैंसिल” बता दी जाती हैं।
इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न केवल युवाओं का आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि वे मानसिक रूप से भी परेशान और हताश हो रहे हैं। जो युवा रोजगार के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें सहयोग देने के बजाय इस तरह से निराश करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
अखिल भारतीय परिसंघ के जिला अध्यक्ष सतीश वानखेड़े ने इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज करते हुए कहा है कि बैंकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और पात्र बेरोजगार युवाओं को समय पर लोन प्रदान करना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि लोन प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और जवाबदेह बनाया जाए तथा बिना ठोस कारण के किसी भी फाइल को निरस्त न किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो संगठन द्वारा सख्त आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित बैंक प्रबंधन की होगी।



