छत्तीसगढ़

CG- राखड़ डेम फूटा तो मचा हड़कंप: राख के सैलाब में दबा जेसीबी ऑपरेटर, मौके पर मौत; पोकलेन ऑपरेटर समेत दो की बची जान…..

कोरबा: एचटीपीपी के ग्राम झाबू स्थित राखड़ डेम के फूटने से बड़ा हादसा हो गया।डेम से निकले राख के तेज बहाव में जेसीबी आपरेटर मलबे में दब गया और उसकी मौत हो गई। पोकलेन ऑपरेटर व एक अन्य बाल -बाल बच गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राख बह कर हसदेव नदी में मिल गया, इसकी वजह से नदी का पानी प्रदूषित हो गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (सीएसईबी पश्चिम संयंत्र) के राखड़ डेम के एक हिस्से में दोपहर के वक्त अचानक दबाव बढ़ गया। इसके चलते डेम का ऊपरी हिस्सा टूट गया और राख का सैलाब बह कर 70 फीट नीचे आ गया। उस समय वहां जेसीबी मशीन से मिट्टी फिलिंग का काम चल रहा था।

आपरेटर कुछ समझ पाता, इससे पहले ही राख के दलदल ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। राख का दबाव इतना ज्यादा था, आपरेटर को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वह मशीन सहित मलबे में दब गया। घटना के वक्त पांच मजदूर काम कर रहे थे। सूचना मिलते ही प्रबंधन और सुरक्षा अमला मौके पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू किया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

घटना की जानकारी मिलने पर एक सीएसईबी का जवाबदार अधिकारी आए पर वह दूर से घटनास्थल को देखकर वापस लौट गए। सूचना मिलने पर पुलिस दोपहर दो बजे पहुंची और राखड़ के अंदर से नजर आ रही लाश को बाहर निकलने का प्रयास शुरू किया गया।

इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह राखड़ डेम तीसरी बार टूटा है। डेम भर जाने की वजह से प्रबंधन ऊंचाई बढ़ा रही है। सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार चिंता जताई गई थी, लेकिन प्रबंधन ने इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। लोगों का आरोप है कि निगरानी और रखरखाव में लापरवाही के कारण ही यह हादसा हुआ है। इस घटना के बाद मजदूरों और स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखा जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कब तक जारी रहेगी और मजदूरों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा।

लापरवाही के आरोप, पहले भी उठ चुके हैं सवाल

राखड़ डेम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों और कामगारों ने समय-समय पर डेम की कमजोर स्थिति और संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दी थी। इसके बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसका नतीजा यह गंभीर हादसा माना जा रहा है।

जानिये क्या है राखड़ डेम, क्यों रहता है खतरा

थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख को जमा करने के लिए राखड़ डेम बनाए जाते हैं। इनमें बड़ी मात्रा में राख और पानी का मिश्रण रहता है। यदि डेम की दीवारों पर दबाव बढ़ जाए या रखरखाव में कमी हो, तो इसके फूटने का खतरा रहता है। ऐसे हादसों में तेज बहाव के साथ भारी मलबा निकलता है, जो जानलेवा साबित होता है।

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