बाॅंकीमोंगरा की राजनीति में नया मोड़,विपक्षीय पार्षदों ने पहले हस्ताक्षर कर नेता प्रतिपक्ष के साथ किया शिकायत,अब कुछ ने लिया शिकायत से किनारा, यह महज एक संयोग या उच्चस्तरीय राजनीति,पढ़े पूरा मामला…

नयाभारत कोरबा सदैव चर्चे में रहेंने वाला बाॅंकीमोंगरा फिर चर्चे में आ गए है,अब राजनीतिक गाजियरो से नया एवं अनोखा मामला सामने आया है।
ज्ञात हो कि 21अप्रैल 2026 को नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास के साथ कांग्रेस के कुल 12 पार्षदों ने एक पत्र में हस्ताक्षर कर उस पत्र को
संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन विभाग बिलासपुर को भेजा,जिसमें नगर पालिका परिषद बाॅंकीमोंगरा में हो रहे टेंडर (निविदा) के अनियमितता सहित कई सारी बातों की शिकायत की गई थी। (पत्र खबर में सलंग्न है.)


महज एक हफ्ते में नया मोड़
शिकायत पे कार्यवाही कुछ होती उससे पहले इस हस्ताक्षर पत्र अभियान ने नया मोड़ लिया उस दिन वाले पत्र में साथ देने वाले कांग्रेसी पार्षदों में से 07 पार्षदों ने नया पत्र संयुक्त संचालक के नाम लिखा,जिसमें वार्ड क्रमांक 17 की पार्षद श्रीमती रुची गुप्ता सहित अन्य पार्षदों ने संयुक्त संचालक नगरीय निकाय विभाग बिलासपुर को पत्र भेजकर पूर्व में दिए गए शिकायत पत्र का खंडन किया है,पत्र में पार्षदों ने कहा है कि नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास द्वारा नगर पालिका परिषद बाॅंकीमोंगरा की कार्यप्रणाली पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन,निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि वार्डों के विकास कार्यों के लिए निधि समय-समय पर आवंटित की जा रही है तथा सभी कार्य नियमानुसार कराए जा रहे हैं।
पार्षदों ने स्पष्ट किया कि परिषद में टेंडर प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत संचालित होती है। ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था लागू है, जिससे किसी प्रकार की मनमानी या पक्षपात की संभावना नहीं है। ऐसे में मनचाहे तरीके से कार्य आवंटन और राशि के दुरुपयोग
जैसे आरोप पूरी तरह असत्य हैं।
गुमराह कर नेता प्रतिपक्ष ने कराया हस्ताक्षर
पत्र में यह भी गंभीर दावा किया गया है कि कुछ पार्षदों को गुमराह कर शिकायत पत्र पर नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास के द्वारा हस्ताक्षर करवा लिए गए था, अब संबंधित पार्षदों ने सामूहिक रूप से उस पत्र से अपना नाम वापस लेते हुए उसका खंडन किया है।
इस पत्र पर कई वार्डों के पार्षदों के हस्ताक्षर होने से मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा नगर पालिका की बैठकों और स्थानीय राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
उच्चस्तरीय राजनीति की आशंका
राजनितिक गलियारों में ये भी चर्चा है कि महज 07 दिनों में साथ में दिए पत्र का दूसरे पत्र में खंडन कही न कही उच्चस्तरीय राजनीति की और इशारा करता है।
क्या सही में पार्षदों को गुमराह किया गया था कि मामले कुछ और?
बाॅंकीमोंगरा में चर्चित हस्ताक्षर मामला सामने आया है उसमें अब बड़ा प्रश्न खड़ा हो रहा है वो ये कि क्या उक्त पत्र को नेता प्रतिपक्ष ने सही में अपने समर्थकों को गुमराह कर के धोखे से हस्ताक्षर करवाया है या फिर शिकायत के बाद बात को दबाने के लिए खंडन पत्र जारी कराया गया है,समझ से परे।



