छत्तीसगढ़

CG – अमलडीहा गोपालपुर चिस्दा सरपंच रहें जनसुनवाई के हिरो उठाए जनता से जूडी समस्या का मुद्दा बड़े नेता समर्थन पत्र बाटते आए नजर क्या जनता बिकने वालों कों देगी फिर मौका? पढ़े पूरी ख़बर

मस्तूरी//पचपेड़ी तहसील के ग्राम कुकुर्दीकला में प्रस्तावित रेत घाट कों लेकर बुधवार कों जनसुनवाई हुई जहाँ अजीब सा सीन देखने मिला और पब्लिक भी यह देख कर हैरान रही यहाँ वो जनप्रतिनिधि जनसुनवाई का मोर्चा सम्भाले हुए थे जिनको क्षेत्र के लाखों ग्रामीण विश्वास कर अपना नेता चुनें हैँ इनमे जिला पंचायत सदस्य से लेकर जनपद सदस्य और सरपंच शामिल हैँ इनमे से कई तो ग्रामीणों कों सहमति पत्र का पर्चा बांटते नजर आए क्या इससे क्षेत्र के लोंगो का इन नेताओं से विश्वास उठेगा क्यों की कोई भी आम पब्लिक किसी भी नेता कों वोट देकर जीताता हैँ ताकि उनकी समस्या और उनके क्षेत्र की मुलभुत समस्याओं से वो क्षेत्र कों मुक्त करेगा और उनकी समस्या कों उच्च अधिकारीयों और नेतृत्व तक पहुचायेगा पर यहाँ तो बिल्कुल उल्टा हो रहा हैँ तो क्या ऐसे नेताओं कों क्षेत्र की जनता दोबारा मौका देगी और क्या ऐसे नेताओं के लिए लोंगो की समस्या से बड़ी पैसा हैँ जवाब जोंधरा क्षेत्र की जनता कों ढूंढना हैँ?

रामायण पैकरा कुकुर्दीकला राहुल केंवट गोपालपुर सरपंच हरिवंश पैकरा सरपंच चिस्दा और किरण पटेल नें लोंगो की बड़ी समस्याओं कों अधिकारियों के सामने उठाया रामायण पैकरा नें कहा की कई सालों से उनके गाँव से रोजाना रेत से भरी गाड़ियां गुजर रही हैँ किन्तु ये नियमों का पालन नहीं करते ना हीं रोड़ में पानी डालते हैँ ना हीं रेत लोड गाड़ियां तारपोलीन ढक कर ले जाते हैँ, वही राहुल केंवट (राजू) नें ओवर स्पीड और जर्जर रोड़ का मुद्दा उठाया उन्होंने कहा की रेत लोड गाड़ियों कों रिहाएसी एरिया से निकलने के दौरान धीरे चलना चाहिए जिससे दुर्घटना की आशंका ना हो, वही चिस्दा सरपंच हरिवंश पैकरा नें जीवंत मुद्दा उठाया उन्होंने बताया की कुछ दिन पहले हीं उनके गाँव चिस्दा में सूरज शुक्ला नाम के 4 वर्षीय मासूम की रेत लोड ओवर स्पीड हाइवा नें कुचला था जिससे उसकी मौक़े पर हीं मौत हो गई जिससे उनके घर परिवार में दुख और दर्द हैँ, हरिवंश का कहना हैँ की ऐसी दुर्घटना ना हो और गाड़ियां स्पीड नियंत्रित किया जाए वही अमलडीहा सरपंच पति किरण पटेल नें रेत घाट संचालको कों गाँवों के विकास पर भी ध्यान देनें और फण्ड मुहैया कराने की बात कही।

किसी भी बड़े नेता नें नहीं किया जनसुनवाई का विरोध।

इस जनसुनवाई की अजीब बात ये रहीं की किसी भी बड़े नेता नें पब्लिक की समस्या कों नहीं समझा और सबने रोड़ और धूल डस्ट का मुद्दा तो उठाया पर अंत में समर्थन में हीं नजर आए और अंत तक जोंधरा क्षेत्र के बड़े नेता मैनेजमेंट के साथ हीं नजर आए हालांकि यही नेता पहले रोड और रेत घाटों से निकल रही गाड़ियों जिससे रोड़ बर्बाद हो रही हैँ कर के मुखर जरूर होते थे प्रदर्शन करते थे और जब जनता की समस्या कों लेकर मुखर होना था जब अधिकारी यहाँ उपस्थित थे तब कोई भी यहाँ एक्टिव नजर नहीं आए।

कम संख्या में पहुंचे ग्रामीण..

जनसुनवाई कों लेकर लोंगो में उत्साह नहीं था और ग्रामीण धुप और शादियों के कारण भारी संख्या शामिल नहीं हुए जो आए वो माइक में बोलने से शरमाते नजर आए कुछ लोंगो नें जरूर माइक संभाला और किसी नें जर्ज़र सड़क का मुद्दा उठाया किसी नें ओवर स्पीड का किसी नें रोड़ में पानी डालने की बात कही तो किसी नें रेत लोड गाड़ियों कों ढक कर परिवहन करने की बात कही पर अंत में समर्थन में हीं नजर आए।

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