छत्तीसगढ़

CG – सतीश वानखड़े द्वारा कुमारपारा, जगदलपुर स्थित सीबीएसई बोर्ड के इंडियन पब्लिक स्कूल में 5 वर्षीय बालिका अरित्री मलिक का विधिवत प्रवेश कराया गया…

जगदलपुर। अखिल भारतीय परिसंघ के जिला अध्यक्ष सतीश वानखड़े द्वारा समाज के प्रति एक अत्यंत प्रेरणादायक एवं सराहनीय पहल की गई है। उन्होंने एक गरीब एवं जरूरतमंद बालिका की शिक्षा का संकल्प लेकर समाज में मानवता और शिक्षा के महत्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

आज वानखड़े द्वारा कुमारपारा, जगदलपुर स्थित सीबीएसई बोर्ड के इंडियन पब्लिक स्कूल में 5 वर्षीय बालिका अरित्री मलिक का विधिवत प्रवेश कराया गया। अरित्री अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार से संबंध रखती है, जिसके माता-पिता अपनी बच्ची को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने में असमर्थ थे। ऐसी परिस्थिति में श्री वानखड़े ने आगे बढ़कर न केवल उसका स्कूल में दाखिला कराया, बल्कि उसकी संपूर्ण शिक्षा का दायित्व भी स्वयं लेने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर श्री सतीश वानखड़े ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा ही वह सबसे प्रभावी माध्यम है, जिसके द्वारा कोई भी बच्चा अपने जीवन को संवार सकता है और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर हम अपने बच्चों को बेहतर सुविधाएं और शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करते हैं, वहीं समाज में अनेक प्रतिभाशाली बच्चे केवल आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि ऐसे बच्चों के माता-पिता भी अपने बच्चों को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उनके सपनों में बाधा बन जाती है। ऐसे में समाज के सक्षम और जागरूक लोगों का कर्तव्य है कि वे आगे आएं और इन बच्चों का सहारा बनें।

वानखड़े ने बताया कि अरित्री मलिक से मुलाकात के दौरान उसकी प्रतिभा और समझ को देखकर उन्हें विश्वास हुआ कि यह बालिका भविष्य में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती है। कम उम्र में ही उसकी सीखने की क्षमता अत्यंत प्रभावशाली है, जो उसके उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी और मानवता की भावना से प्रेरित होकर की गई है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

श्री वानखड़े ने समाज के सभी सक्षम और जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे भी आगे आकर अपने आसपास के गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग करें। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक-एक बच्चे की जिम्मेदारी ले ले, तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा और समाज तीव्र गति से प्रगति करेगा।

अंत में उन्होंने बाबा साहेब के इस प्रेरणादायक कथन को दोहराया—
“शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पियेगा वही दहाड़ेगा।”

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