छत्तीसगढ़

CG – सरकारी तंत्र बेहाल पंचायत उप संचालक के जांच आदेश की पाली जनपद में नाफरमानी मुनगाडीह में हुए भ्रष्ट्राचार की जांच में हील हवाला कर रहे अधिकारी पढ़े पूरी ख़बर

0 तीन दिवस में सौंपना था जांच रिपोर्ट, 7 दिन बाद भी पंचायत नही पहुँच सके जांच अधिकारी.

0 भ्रष्ट्राचारी सरपंच- सचिव को बचाने के प्रयास का आरोप.

कोरबा//अनियमितताओं और भ्रष्ट्राचार के आरोपों में फंसे मुनगाडीह ग्राम पंचायत के सरपंच- सचिव पर जनपद पंचायत के अधिकारी खासे मेहरबान है, शायद इसीलिए जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर पंचायत उप संचालक द्वारा 3 दिवस के भीतर मांगे गए जांच रिपोर्ट तो दूर जांच टीम 7 दिन बाद भी जांच के लिए पंचायत नही पहुँच पाई है।

ज्ञात हो कि ग्राम पंचायत मुनगाडीह में बिना काम 15वें वित्त मद से लाखों रुपए आहरण कर गबन के गंभीर मामले सामने आए है। ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर फर्जी बिलों से विकास राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2025- 26 में बिना कार्य किये 15वें वित्त से लाखों रुपए निकाले गए है, जबकि जमीन पर किसी प्रकार का काम नही हुआ है और कुछेक काम हुए भी है उसके लागत से दो- तीन गुना अधिक राशि निकाली गई है। आरोपों के मुताबित मिडिल स्कूल में शौचालय मरम्मत, प्राथमिक शाला अतिरिक्त कक्ष मरम्मत, नाली सफाई कार्य, नाली मरम्मत, पेयजल स्रोतों के रखरखाव व नए पेयजल स्रोतों के नाम पर भुगतान किया गया है, लेकिन इनमें से कोई काम नही हुए है। वहीं पाइप लाइन विस्तार के काम मे लागत से बहुत अधिक राशि निकाली गई है।

ग्रामीणों का दावा है कि सरपंच- सचिव ने बोगस बिलों से 15वां मद की राशि का बंदरबांट किया है तथा उन्होंने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की अपेक्षित मांग जिला प्रशासन से की। जिसे खबरों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, तब जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग ने पंचायत उप संचालक को जांच के निर्देश दिए। जिसके संबंध में पाली जनपद सीईओ को 14 मई 2025 को आदेश क्रमांक- 2721/ पंचा./ शिका./ 2026 जारी कर जांच ज्ञापन प्राप्ति के 03 दिवस कके भीतर पंचायत में हुए भ्रष्ट्राचार की जांच कर प्रतिवेदन अभिमत सहित मांगा गया है। लेकिन इस दिशा पर जनपद के अधिकारी पंचायत में हुए लाखों भ्रष्ट्राचार की जांच लटकाने और आदेश में हील- हवाला करने में लगे है। जबकि मामले को लेकर गंभीर न होना और जांच में ढिलाई बरतना प्रशासनीक लापरवाही है, क्योंकि जब शीर्ष अधिकारी किसी वित्तीय अनियमितता या घोटाले की जांच जनपद अधिकारी को सौंपते है तो उसे एक तय समय- सीमा में पूरा करना अनिवार्य होता है, किन्तु यहां पर तो जांच मामले को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, यह न सिर्फ जवाबदार अधिकारी द्वारा अपने पदीय कर्तव्यों का निर्वहन न करना है बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के जांच आदेश की अवहेलना भी करना है।

ऐसे में 7 दिन बाद भी जांच टीम के पंचायत न पहुँच पाने को लेकर भ्रष्ट्राचारी सरपंच- सचिव को बचाने के प्रयास का आरोप ग्रामीण लगा रहे है। ग्रामीणों की मांग है कि 15वें वित्त आय- व्यय से संबंधित समस्त अभिलेखों का निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति दोहराई न जाए। उनका कहना है यदि जांच में लेट- लतीफी होती है या लीपापोती का प्रयास किया जाएगा तो वे कलेक्टर जनदर्शन में उपस्थित होने मजबूर रहेंगे।

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