छत्तीसगढ़

जमीन गई,मुआवजा नहीं मिला: न्याय की आस में दूसरी बार कवर्धा कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान,आंदोलन की चेतावनी

कवर्धा/पंडरिया।सेमरकापा माइनर नहर परियोजना से प्रभावित किसान परिवार न्याय और मुआवजे की मांग को लेकर एक बार फिर कलेक्ट्रेट की चौखट पर पहुंचे। किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि उनकी निजी कृषि भूमि का उपयोग नहर एवं सर्विस रोड निर्माण में किया गया,लेकिन आज तक उन्हें नियमानुसार मुआवजा नहीं मिला। लंबे समय से विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे किसान परिवार अब धरना-प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।

किसानों का कहना है कि जल संसाधन विभाग ने उनकी सहमति लिए बिना ही खेतों में निर्माण कार्य शुरू कर दिया। कई स्थानों पर भारी मशीनें सीधे कृषि भूमि में उतार दी गईं, जिससे फसलें और उपजाऊ जमीन प्रभावित हुई। प्रभावित किसानों के अनुसार न तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही समय पर मुआवजा भुगतान किया गया।

खेत चले गए, मुआवजा अब तक नहीं

प्रभावित किसान मोचन धुर्वे ने बताया कि उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा नहर परियोजना में चला गया है,जिससे परिवार की आय पर सीधा असर पड़ा है।उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी और इंजीनियर किसानों के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। कई बार संपर्क करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला है,जबकि जमीन का उपयोग परियोजना के लिए किया जा रहा है।

बिना अनुमति खेतों में पहुंचीं मशीनें

किसान असलम खान ने आरोप लगाया कि विभाग ने किसानों को विश्वास में लेना भी जरूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और विभाग जल्द न्याय नहीं देते तो प्रभावित किसान सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

छोटे किसानों पर सबसे बड़ी मार

किसान घनश्याम साहू का कहना है कि कम रकबे वाले किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। उनकी जमीन का बड़ा हिस्सा परियोजना में समाहित हो गया, जिससे आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा निर्धारित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

मुआवजा निर्धारण पर भी उठे सवाल

किसानों ने मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शासन की गाइडलाइन के अनुरूप कार्रवाई नहीं की जा रही है। किसानों के अनुसार प्रभावित परिवारों की सूची तैयार होने और कुछ क्षेत्रों में मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही। वहीं जिम्मेदार अधिकारी भी इस विषय पर खुलकर जवाब देने से बच रहे हैं।

विकास कार्यों का समर्थन,अधिकारों की अनदेखी का विरोध

क्षेत्र के नागरिकों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे नहर परियोजना,नहर नवीनीकरण तथा लगभग 50 फीट चौड़े सर्विस रोड निर्माण जैसे विकास कार्यों का स्वागत करते हैं। उनका मानना है कि इससे पंडरिया-कुंडा क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। लोगों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव सायं बीजेपी सरकार,स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन द्वारा कराए गए विकास कार्यों की सराहना की है।

हालांकि उनका स्पष्ट कहना है कि विकास कार्य किसानों के अधिकारों की कीमत पर नहीं होने चाहिए। जिन परिवारों की जमीन परियोजना में उपयोग की गई है,उन्हें नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

किसानों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन की प्रतिलिपि पंडरिया विधायक भावना बोहरा,राजस्व विभाग,जल संसाधन विभाग तथा जनप्रतिनिधियों को भी दिया गया है। अब प्रभावित परिवारों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायसंगत मुआवजे पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो क्षेत्र में बड़ा किसान आंदोलन देखने को मिल सकता है।

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