छत्तीसगढ़बेमेतरा जिला

CG BEMETARA :रियूनियन – “वो दिन भी क्या दिन थे…” (शिक्षकों का सम्मान समारोह)..बेमेतरा के ‘द किंग महल’ में सजी पुरानी यादों की महफिल, 1980 से 2007 बैच की छात्राएं हुईं एकजुट

द किंग महल बेमेतरा में हुआ कार्यक्रम आयोजित

संजू जैन जिला संवाददाता NAYABHARAT. LIVE

7000885784..8463812334

​बेमेतरा:​बेमेतरा के ‘द किंग महल’ में सजी पुरानी यादों की महफिल, 1980 से 2007 बैच की छात्राएं हुईं एकजुट वो दिन भी क्या दिन थे…” थीम पर आयोजित रियूनियन में छात्राओं ने अपने गुरुजनों का किया भावपूर्ण सम्मान ​शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर छात्राओं ने जताया शिक्षकों के प्रति आभार; भावुक हुए गुरुजन

स्कूल के सुनहरे दौर की यादें हमेशा दिल के करीब होती हैं कुछ ऐसी ही पुरानी और खूबसूरत यादों को ताजा करने के लिए बेमेतरा के ‘द किंग महल’ में एक बेहद भावुक और सराहनीय रियूनियन (मिलन समारोह) का आयोजन किया गया। “वो दिन भी क्या दिन थे…” थीम पर आधारित इस गरिमामयी समारोह में सन् 1980 से लेकर 2007 बैच तक की पूर्व छात्राएं एक मंच पर एकत्रित हुईं ​इस दौरान सालों बाद एक-दूसरे से मिलकर जहाँ सहेलियों की आँखें भर आईं, वहीं अपनी पुरानी छात्राओं को कामयाबी के शिखर पर देख गुरुजनों का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया इस मिलन समारोह को यादगार बनाने के लिए छात्राओं ने अपने सेवानिवृत्त और वरिष्ठ शिक्षकों को शॉल,श्रीफल और विशेष स्मृति चिन्ह (Memento) भेंट कर उनका पाद-पूजन व सम्मान किया ​कार्यक्रम के दौरान मंच से भाषण देते हुए छात्राओं ने कहा कि उनके शिक्षकों द्वारा दी गई शिक्षा, संस्कार और अनुशासन की बदौलत ही वे आज जीवन के इस मुकाम पर पहुंच पाई हैं ​वहीँ, समारोह में पहुंचे शिक्षकों ने भी अपनी पुरानी यादों को साझा किया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक वरिष्ठ शिक्षक ने बेहद भावुक कर देने वाली बात कही वक्त इतनी तेजी से बदलता है कि पता ही नहीं चलता। आज का दौर ऐसा है जहाँ लोग कम उम्र में ही सेटल हो जाते हैं, और जीवन का चक्र इतनी रफ्तार से घूमता है कि जो कल तक खुद बच्चे थे, वे न सिर्फ माता-पिता बनते हैं, बल्कि देखते ही देखते नाना-नानी और दादा-दादी भी बन जाते हैं। यह जिंदगी का एक बेहद खूबसूरत पड़ाव है, जहाँ एक ही इंसान एक तरफ अपने बच्चों को संभाल रहा होता है और दूसरी तरफ नाती-पोतों के साथ अपना बचपन दोबारा जी रहा होता है इस कार्यक्रम में उपस्थित ​रामशरण मिश्रा, त्रिलोचन साहू, श्रीमती गंगा जैन श्रीमती रजनी रेड्डी, बनाफर सर व्यवस्थापक में मंजू तिवारी, अनु पांडे,रेनू तिवारी, विद्या जैन, मनिंदर, अजीत गांधी,संध्या जैन,वर्षा जैन,सुमन साहू,Neetu Sunita bisen,रानू खान, मधु जैन,ललित ठाकुर, रश्मि केसरवानी, रश्मि,गोलू चौबे,नीलू चौबे, राधा सिंह, स्वाति शर्मा, तारा,अर्चना वैष्णव,वंदना दीवान, कल्पना दीवान, मंजू सिंह सुनीता राजपूत अन्य उपस्थित रहे

निश्चित रूप से, इस आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने व्यस्त समय से पल निकालकर, अपने गुरुओं को याद करना और इस तरह का सम्मान समारोह आयोजित करना समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button