छत्तीसगढ़

CG – कर्रा में हिन्द एनर्जी कोल वाशरी विस्तार पर गुपचुप जनसुनवाई की तैयारी गतौरा,लिमतरा,फरहदा के लोग पहले से डस्ट से त्रस्त ग्रामीणों में उबाल पढ़े पूरी ख़बर

बिलासपुर//जिले के ग्राम कर्रा में हिन्द एनर्जी ग्रुप के कोल वाशरी प्लांट विस्तार को लेकर गुपचुप तरीके से जनसुनवाई की तैयारी चल रही है। आरोप है कि प्रदूषण से पहले से त्रस्त गतौरा रेलवे स्टेशन, जेके कॉलेज, ग्राम पंचायत कर्रा, लिमतरा, गतौरा, फरहदा के लोगों को अंधेरे में रखकर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सूचना मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। हालांकि अभी तक प्लांट के कर्मचारियों कों भी जनसुनवाई की डेट नहीं बताई गई है कुछ प्लांट में कार्यरत लोंग भी यही बोल रहें है की जनसुनवाई तो होनी है पर कब होनी है ये पता नहीं है।

क्या है पूरा मामला…

1.विस्तार की तैयारी हिन्द एनर्जी ग्रुप कर्रा स्थित अपने कोल वाशरी प्लांट की क्षमता बढ़ाने जा रहा है। इसके लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जनसुनवाई अनिवार्य है।

2.गुपचुप’ सुनवाई का आरोप*: ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी और प्रशासन ने मिलकर जनसुनवाई की तारीख तय कर ली, लेकिन व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया। “सिर्फ पंचायत भवन पर एक कागज चिपका दिया। अखबार में विज्ञापन भी छोटे साइज में छपवाया ताकि किसी को पता न चले” – ग्रामीण राजेश सिंह ने कहा।
3.पहले से ही हालत खराब कर्रा,लिमतरा, गतौरा, फरहदा के लोग मौजूदा प्लांट से निकलने वाले कोल डस्ट से त्रस्त हैं। गतौरा रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म, पटरियों पर काली परत जम जाती है। यात्री परेशान यही से कोल् लोड और अनलोड होता है जहाँ आपको भारी डस्ट की मोटी परत दिख जाएगी और यात्रियों कों भी डस्ट से भारी परेशानी होती है।

जेके कॉलेज गतौरा कोल डस्ट से क्लासरूम में बैठना मुश्किल। रास्ते में आते जाते कपड़े ड्रेस पूरी तरह बर्बाद हो जाते है छात्र-छात्राओं को सांस, आंख में जलन की शिकायत आम है।

फसलें बर्बाद खेतों में धान, सब्जी पर डस्ट की परत। पैदावार 40% तक घट गई।

स्वास्थ्य संकट…गांव में दमा, टीबी, स्किन एलर्जी के मरीज बढ़े हैं।

ग्रामीणों का विरोध…

“पुराने प्लांट से ही हमारा जीना मुहाल है, विस्तार हुआ तो गांव खाली करना पड़ेगा” – फरहदा की सरपंच प्रतिनिधि सुनीता बाई ने कहा। ग्रामीणों ने कलेक्टर और पर्यावरण मंडल को ज्ञापन देकर मांग की है…

1.जनसुनवाई निरस्त कर नए सिरे से व्यापक प्रचार के साथ तारीख तय हो।

2 पहले मौजूदा प्रदूषण की जांच हो और कंपनी पर कार्रवाई हो।

3.स्वास्थ्य सर्वे कराकर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाए।

नियम क्या कहते हैं…

EIA नोटिफिकेशन 2006 के तहत जनसुनवाई की सूचना 30 दिन पहले प्रमुख अखबारों, पंचायतों और वेबसाइट पर देनी अनिवार्य है। प्रभावित 5 किमी के दायरे के सभी गांवों में मुनादी कराना भी जरूरी है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन नियमों का पालन नहीं हुआ।

ग्रामीणों में आक्रोश…

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर गुपचुप सुनवाई हुई तो वे हाईकोर्ट जाएंगे और प्लांट के सामने चक्काजाम करेंगे। पर्यावरण प्रेमियों ने भी समर्थन दिया है।

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