छत्तीसगढ़

CG – गुरूजी का हैरतअंगेज कारनामा : खुद ही जारी कर दिया बहाली का आदेश, फर्जी आदेश से विभाग में मचा हड़कंप…..

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से निलंबित शिक्षक का हैरतअंगेज कारनामा सामने आया है। यहां निलंबित शिक्षक ने ई-मेल के जरिए खुद की बहाली का फर्जी आदेश जारी कर दिया। बताया जा रहा है कि इसके लिए बकायदा सामान्य प्रशासन विभाग के लेटरहेड का दुरुपयोग करते हुए दस्तावेज तैयार किया और उसे उच्च अधिकारियों को भेज दिया। जिससे कुछ समय के लिए शिक्षा विभाग में भ्रम की स्थिति बन गई। लेकिन बाद में इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद अब अधिकारी कानूनी कार्रवाई करने की बात कह रहे है।

जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला प्राथमिक शाला खर्सीडीह का है। यहां पदस्थ शिक्षक शिक्षक शेषनारायण साहू के खिलाफ 3 महीने पहलेही हेडमास्टर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत भेजी गई थी। शिकायत में बताया गया था कि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं आता, शालेय कार्यों में सहयोग नहीं करता और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करता है। साथ ही उस पर ग्रामीणों को भड़काने और शिकायत करने पर धमकी देने के भी आरोप लगे थे।

इन आरोपों की जांच कराई गई, जिसमें शिकायतें सही पाई गईं। जांच रिपोर्ट में शिक्षक की अनियमित उपस्थिति और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की पुष्टि हुई। जिससे छात्रों की पढ़ाई और स्कूल की गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। जिस पर एक्शन लेते हुए 21 जनवरी 2026 को संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग दुर्ग द्वारा शेषनारायण साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि में शिक्षक का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, छुरिया जिला राजनांदगांव निर्धारित किया गया था।

शिक्षक के निलंबन के प्रकरण में नया मोड़ तब आया। जब ई-मेल के माध्यम से शिक्षक की बहाली का आदेश सामने आया। आदेश में दावा किया गया कि विभागीय जांच के बाद निलंबन समाप्त कर दिया गया है और शिक्षक को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुपेला में पदस्थ किया गया है। आदेश देखने में पूरी तरह आधिकारिक लग रहा था। जिससे विभाग में असमंजस की स्थिति बन गई।

बताया जा रहा है कि ये पूरा मामला तब उजागर हुआ जब अधिकारियों को आदेश की भाषा और शब्दावली संदिग्ध लगी। जांच में प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि आदेश निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप जारी नहीं किया गया है। इसके बाद संभागीय शिक्षा कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि यदि ई-मेल फर्जी पाया जाता है, तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा और मामला पुलिस को सौंपा जाएगा। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

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