उत्तर प्रदेश

देशभक्ति और परोपकार का जज़्बा होना चाहिए – बाबा उमाकान्त महाराज

देशभक्ति और परोपकार का जज़्बा होना चाहिए – बाबा उमाकान्त महाराज

सुभाषचंद्र बोस और जापान के नौजवान के प्रसंग से बाबाजी ने समझाया देशभक्ति और परोपकार का महत्व

लखनऊ, उत्तरप्रदेश। परम पूज्य बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि सभी पार्टियों में भी अच्छे नेता हैं। उनमें भी शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त नेता हैं और देश सेवा करना चाहते हैं। आप शाकाहारी, सदाचारी, देशभक्त लोग जब आगे बढ़ोगे तो वो सब आपके साथ हो जाएंगे। उनको बस कहने, बताने और समझाने की जरूरत है। वो आपकी बातों को पहुंचाएंगे, जरूरत पड़ेगी तो साथ भी देंगे। इसीलिए आप सब को जोड़ लो अपने में। कोई बुरा होगा, आपके साथ रहेगा तो वो भी सुधर जाएगा। तो उनको सुधार लो।शाकाहारी, सदाचारियों का समूह बना लो, अब इसकी जरूरत है।

सुभाष चंद्र बोस और जापान का नौजवान।

जब सुभाष जापान पहुंचे तो उन्होंने कहा कि मेरा देश खतरे में है, आजादी खतरे में है और हम देश को आजाद कराना चाहते हैं, लेकिन आजाद होने की पूरी उम्मीद नहीं है, तो तुम लोग मेरा साथ दो। तो उनसे पूछा गया कि किस तरह से साथ देने की जरूरत है? तब सुभाष बोले कि कोई नौजवान अगर अपनी कुर्बानी देने के लिए तैयार हो जाए तो मेरा देश आजाद हो सकता है। तभी बैठे हुए कई नौजवानों में से एक ने कहा, मैं कुर्बानी दूंगा। कहा अपने देश के लिए तो सब मरते मिटते हैं, मैं परोपकार करूंगा, तुम्हारे देश के लिए कुर्बान हो जाऊंगा। सुभाष ने पूछा तुम्हारे घर में और कौन है? उसने कहा केवल एक मेरी बूढ़ी मां है। सुभाष ने कहा तेरी बूढ़ी मां ही इस रास्ते में तेरी बाधक बन जाएगी। वही प्रेम में तुझको नहीं जाने देगी। तब वह निराश होकर मां के पास पहुंचा और मां से कहा, “मां! तू अगर न होती, तो मैं आज भारत देश के काम आ गया होता।” लोग कहते हैं सती, सावित्री, पद्मावती यहीं (भारत में) पैदा हुई थी लेकिन वह मां किससे कम थी? मां ने कहा “उठा ला तलवार, काट देती हूं मैं अपनी गर्दन और ले जा करके सुभाष के सामने रख देना और कह देना मेरी मां नहीं रही, चल मैं तेरे भारत देश के काम आ जाऊंगा।” उसने ऐसा ही किया। जब सुभाष ने उसके शरीर में बॉम्ब बांधा तो वह जो असलहे भर करके विदेशों से आ रहे थे, अगर वो असलहे जहाज से आ गए होते तो कभी भी देश आजाद ना होता। हम आप अपने को आजाद देश के नागरिक नहीं कह सकते थे, आज़ादी की स्वांस नहीं ले सकते थे। लेकिन जब बॉम्ब बांध करके उन्होंने चिमनी में डाला और जहाज फटा तब अंग्रेजों के कलेजे फट गए, बोले अब भारत देश को छोड़ना ही पड़ेगा। यहाँ से भगना ही पड़ेगा।

बीमारी व तकलीफों में आराम देने वाला नाम “जयगुरुदेव”

किसी भी बीमारी, दुःख, तकलीफ, मानसिक टेंशन में शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त रहते हुए जयगुरुदेव जयगुरुदेव जयगुरुदेव जय जयगुरुदेव की ध्वनि रोज सुबह-शाम बोलिए व परिवार वालों को बोलवाइए और फायदा देखिए।

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