छत्तीसगढ़

CG – सर्वे में बड़ा खेल : सरकारी रिकॉर्ड में बताया इस चीज का फसल, खेत में लहलहाती मिली अफीम की फसल, कलेक्टर ने तीन अफसरों को थमाया नोटिस…..

दुर्ग। दुर्ग जिले में सामने आए अफीम की अवैध खेती के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। जिस खेत में अफीम की फसल लहलहा रही थी, उसे कृषि विभाग के अधिकारी लगातार मक्का की फसल बताकर रिपोर्ट करते रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

कलेक्टर ने कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू, फसल सर्वेयर शशिकांत साहू और ग्राम समोदा की पटवारी अनिता साहू से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जांच में तीनों अधिकारियों की लापरवाही सामने आने के बाद यह नोटिस जारी किया गया है।

जांच के दौरान सबसे बड़ी गड़बड़ी कृषि विस्तार अधिकारी के स्तर पर सामने आई। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि विनायक ताम्रकार के भाई विमल ताम्रकार के जिस खेत को कृषि विस्तार अधिकारी ने मक्का फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताया था, वहां वास्तव में धान की खेती हो रही थी। इससे यह संकेत मिलता है कि शासन को गुमराह करते हुए जानबूझकर खेत का स्थान बदला गया। इतना ही नहीं, प्रदर्शन प्लॉट के नाम पर राज्य शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी जारी कर दी गई।

नियम के अनुसार, प्रदर्शन प्लॉट की फोटो उसी किसान के साथ ली जानी चाहिए जिसे सरकारी लाभ मिलना है। लेकिन रिपोर्ट में धान की जगह मक्का के खेत के पास एक अन्य किसान को खड़ा कर फोटो खींचकर अपलोड कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि जिस खेत की मक्का की फोटो लगाई गई उसके ठीक पीछे अफीम की खेती की जा रही थी।

फसलों के सर्वे के लिए नियुक्त फसल सर्वेयर शशिकांत साहू ने सितंबर 2025 में खेत का डिजिटल सर्वे किया था। इसके बाद उसने फोटो गिरदावरी सॉफ्टवेयर में जानकारी अपलोड की। इसमें उसने खसरा नंबर 309 को पड़त भूमि और खसरा नंबर 310 में धान की फसल होने की जानकारी दर्ज की, जबकि जांच में पाया गया कि इन्हीं दोनों खसरा नंबरों पर अफीम की खेती की जा रही थी।

नियमों के अनुसार सर्वेयर की रिपोर्ट के बाद पटवारी को मौके पर जाकर सत्यापन करना होता है, लेकिन आरोप है कि पटवारी ने बिना स्थल जांच किए ही रिपोर्ट को मंजूरी देकर सॉफ्टवेयर में अपलोड कर दिया, जिससे अवैध अफीम की खेती छिपी रह सके। प्रारंभिक जांच में यह भी संभावना जताई जा रही है कि तीनों अधिकारियों की भाजपा नेता विनायक ताम्रकार से सांठगांठ हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में जांच जारी है। कलेक्टर ने तीनों अधिकारियों से पांच बिंदुओं पर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। जवाब के आधार पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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