धमतरी में आदिवासी समाज का बड़ा आंदोलन: वनभूमि और बीट बंटवारे को लेकर चक्काजाम,28 अक्टूबर तक समाधान करो, वरना जेल भरो

Chhattisgarh धमतरी/नगरी। धमतरी जिले के नगरी तहसील अंतर्गत ग्राम कोहाबाहरा में वनाधिकार और भूमि संबंधी मांगों को लेकर आदिवासी ग्रामीणों का आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। बुधवार 8 अक्टूबर 2026 को ग्रामीणों ने शहीद वीर नारायण सिंह चौक, गट्टासिल्ली एवं नगरी तिराहा मार्ग पर सामूहिक रूप से चक्का जाम और प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों की ओर से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के स्थायी और निष्पक्ष निराकरण के लिए 20 दिन की समय-सीमा, यानी 28 अक्टूबर 2026 तक, दी गई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो प्रभावित आदिवासी परिवार महिला, बच्चे, बुजुर्ग और पशुधन सहित सामूहिक रूप से ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करेंगे।
1987 के समझौते के पालन की मांग…
ग्रामीणों के ज्ञापन में 5 अगस्त 1987 के ऐतिहासिक सिहावा नगरी समझौते का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज के अनुसार तत्कालीन वन सचिव, वन संरक्षक रायपुर वृत्त, कलेक्टर रायपुर एवं जनप्रतिनिधियों के मध्य हुए इस समझौते में वन ग्रामों में काबिज आदिवासियों के व्यवस्थापन और न्यायिक परिरक्षण से संबंधित निर्णय का उल्लेख है।
ग्रामीणों का दावा है कि उक्त ऐतिहासिक समझौते के बावजूद आज भी उनकी जमीन और वनाधिकार से जुड़े मामले पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। ज्ञापन में न्यायालयीन प्रकरण क्रमांक 546/84, धारा 447 IPC एवं भारतीय वन अधिनियम से जुड़े मामले तथा वन विभाग द्वारा जारी M.P.T.C. जुर्माना रसीदों को भी अपने दावे के समर्थन में महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया गया है।
अपील आदेश के पालन को लेकर भी सवाल…
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं DFO धमतरी द्वारा पारित आदेश का भी उल्लेख किया है। दस्तावेज के मुताबिक अपीलीय प्रकरण क्रमांक 52-08/2026 में आदेश दिनांक 11 सितंबर 2026 का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने कहा है कि संबंधित जांच प्रतिवेदन और दस्तावेजों के आधार पर मामले का निराकरण किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि आदेश पारित होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और जमीन विवाद का समाधान अब तक लंबित है। इसी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।
ज्ञापन के अनुसार पूर्व में भेजी गई 7 दिवसीय वैधानिक सूचना के अनुरूप 8 अक्टूबर को सुबह करीब 10 बजे से शहीद वीर नारायण सिंह चौक गट्टासिल्ली एवं नगरी तिराहा मार्ग पर प्रभावित ग्रामवासियों ने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के शामिल होने का दावा किया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने वनाधिकार, सीमांकन और पुराने दस्तावेजों से जुड़े मामलों के निराकरण की मांग रखी।
20 दिन की अंतिम समय-सीमा…
ग्रामीणों ने प्रशासन को 28 अक्टूबर 2026 तक 20 दिनों का अंतिम अवसर देने की बात कही है। ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं—
1. संयुक्त राजस्व एवं वन दल द्वारा सीमांकन: ग्राम कोहाबाहरा के अंतर्गत विवादित वन भूमि का संयुक्त रूप से सीमांकन कर स्पष्ट एवं पारदर्शी निराकरण किया जाए।
2. अभिलेखों का सार्वजनिक प्रकटीकरण: DFO धमतरी के अपीलीय आदेश दिनांक 11 सितंबर 2026 के पालन में संबंधित जांच प्रतिवेदन एवं केस से जुड़े अभिलेख ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।
3. पारंपरिक वन अधिकारों की मान्यता: ग्रामीणों ने संविधान की पांचवीं अनुसूची, PESA Act 1996 और वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के तहत ग्राम सभा के अधिकारों को मान्यता देने तथा आदिवासियों के निस्तार एवं कास्त अधिकारों को सुरक्षित करने की मांग की है।
मांग पूरी नहीं हुई तो ‘जेल भरो आंदोलन’…
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 28 अक्टूबर 2026 तक उनकी मांगों का स्थायी और प्रशासनिक आदेश के माध्यम से निराकरण नहीं किया जाता है, तो ग्राम कोहाबाहरा एवं प्रभावित वन ग्रामों का आदिवासी समाज अपने परिवारजनों—महिला, बच्चे, बुजुर्ग और पशुधन—के साथ तहसील एवं जिला मुख्यालय की ओर कूच कर सामूहिक ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करेगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक आदिवासियों के लंबित अधिकारों और दावों का विधिवत निराकरण नहीं हो जाता।
प्रशासन पर संवैधानिक जिम्मेदारी का हवाला…
ग्रामीणों ने संविधान के अनुच्छेद 19 एवं 21 का हवाला देते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की बात कही है। साथ ही उन्होंने कहा है कि 20 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति के लिए जिला एवं पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार माना जाएगा।
कलेक्टर से लेकर शासन तक भेजी गई प्रतिलिपि..
ग्रामीणों की ओर से यह ज्ञापन कलेक्टर धमतरी को संबोधित किया गया है। इसकी प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF & HoFF), संभागीय आयुक्त रायपुर तथा छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग सहित संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने का उल्लेख है,ज्ञापन पर ग्राम कोहाबाहरा निवासी शिव प्रसाद नेताम, आत्मज विक्रम सिंह नेताम की ओर से आवेदन प्रस्तुत किया गया है।

