छत्तीसगढ़

CG – 3.29 लाख का पानी गटकने वाले कोरबी (सी) के सरपंच-सचिव मिलीभगत का कारनामा : नाली निर्माण के नाम पर बिना काम निकाल ली 1.11 लाख की राशि जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

0 तत्कालीन सरपंच कार्यकाल में निर्मित नाली को बताया वर्तमान निर्माण.

0 ग्रामीणों द्वारा भ्रष्ट्राचार के विरुद्ध निष्पक्ष जांच और उचित कार्यवाही की जिला प्रशासन से मांग.

कोरबा//पंचायत सरकार भी कैसे- कैसे कारनामे करती है, कोरबी (सी) पंचायत में हो रहे मनमाने भ्रष्ट्राचार इस बात की पोल खोल रहा है, जहां नाली का निर्माण होना था, धरातल पर निर्माण तो नही हुआ लेकिन कागज पर कामकाज दिखाकर 1.11 लाख रुपए का भुगतान 15वें वित्त मद से हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सरपंच और सचिव के साथ जनपद अधिकारियों के मिलीभगत से यह फर्जी भुगतान हुआ है।

पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत कोरबी (सी) के निर्वाचित सरपंच कीर्ति कुमार उइके व सचिव मेहरून निशा के सांठगांठ से बुनियादी विकास और निर्माण कार्यों की आड़ में बेखौफ होकर सरकारी पैसा बड़ी आसानी से डकार रहे है। सरकार द्वारा पंचायती कार्यों में गड़बड़झाला रोकने और पारदर्शिता लाने अनेकों प्रयास के बाद भी ऐसे भ्रष्ट्र सरपंच सचिव अपने करतूतों से बाज नही आ रहे है। संबंधित विभाग के अधिकारियों ने भी सरपंच सचिव को लूट की खुली छूट दे रखी है, ताकि सरपंच सचिव अपनी जेबें भरने के साथ गबन की गई राशि से उनकी जेब भी भर सके। यही कारण है कि लाखों का बजट मिलने के बाद भी कोरबी (सी) गांव पिछड़ेपन का अभिशाप झेलने को मजबूर है और ग्राम में अपेक्षित बुनियादी सुविधाओं का अभाव जस का तस दिख रहा है। इस पंचायत के सरपंच व सचिव द्वारा मिलकर पेयजल व्यवस्था में सबमर्सिबल व सिंटेक्स, हेंडपम्प पाइप- रॉड सामाग्री, पानी टंकी सामाग्री के नाम पर बिना काम 3 लाख 29 हजार गटक लिया, अब नाली निर्माण का काम भी धरातल के बजाय कागज में कराकर 1 लाख 11 हजार की राशि का बंदरबांट कर लिया गया। जियोटैग के अनुसार नाली निर्माण सामाग्री क्रय के नाम पर रिचार्ज बाउचर 05/08/2025 की तिथि में 1 लाख 11 हजार 785 रुपए की राशि 15वें वित्त मद से निकाली गई है, जबकि पूरे पंचायत में कहीं पर भी वर्तमान सरपंच में नाली का निर्माण नही कराया गया है तथा तत्कालीन सरपंच कार्यकाल में निर्मित नाली को वर्तमान का बता भारी- भरकम राशि डकार ली गई। इस भ्रष्ट्राचार मामले में संबंधित अधिकारियों का रवैया भी हैरान करने वाला है, क्योंकि सरकार के गाइड लाइन के अनुसार यदि 50 हजार से ऊपर का भुगतान पंचायत द्वारा करना हो तो उसके लिए तकनीकी स्वीकृति और मूल्यांकन, सत्यापन जरूरी होता है, किंतु बिना काम सवा लाख राशि आहरण की अनुमति आखिर किस आधार पर मिली, यह सोचनीय बात है। ऐसे में कहीं न कहीं संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत परिलक्षित होता है। सरपंच- सचिव के और भी कारनामे है जिसे अगले अंक में प्रसारित किया जाएगा। बहरहाल सरपंच सचिव के ऐसे भ्रष्ट्र कृत्य को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने भ्रष्ट्राचार के विरुद्ध निष्पक्ष उचित जांच एवं कार्यवाही की मांग जिला प्रशासन से की है।

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