CG- हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : पत्नी की इस हरकत को कोर्ट ने माना मानसिक क्रूरता, पति को दी तलाक की मंजूरी……

बिलासपुर। पत्नी की ओर से बार-बार अपमानित करने, मारपीट करने, चरित्र पर संदेह जताने और बुजुर्ग मां से अलग रहने का दबाव बनाने के आरोपों को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने वैवाहिक जीवन में मानसिक क्रूरता माना है। फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए पति को तलाक की अनुमति दे दी है।
पत्नी ने पति और ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने, ठीक से भोजन नहीं देने और एक कमरे तक सीमित रखने का आरोप लगाई थी। दोनों पक्षों के साक्ष्यों की समीक्षा के बाद हाई कोर्ट ने पति मित्तेश पणिग्राही को तलाक की डिक्री दे दी। जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने जगदलपुर फैमिली कोर्ट के 10 दिसंबर 2022 के फैसला रद्द कर दिया है।
जानिए क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ बस्तर जिले के जगदलपुर निवासी मित्तेश पणिग्राही ने पत्नी वेदवती उर्फ ममता के खिलाफ मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था। दोनों का विवाह 8 जून 2017 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। दंपती की कोई संतान नहीं है। फैमिली कोर्ट ने पति के आरोपों को प्रमाणित नहीं मानते हुए तलाक की अर्जी खारिज कर दिया था। फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मित्तेश ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
पति का कहना था कि वह किराये की छोटी इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान चलाता था और उसकी सीमित आय की जानकारी शादी से पहले पत्नी के परिवार को थी। इसके बावजूद पत्नी उसे कम कमाई को लेकर ताने देती और ‘भिखारी’ व हैसियतहीन कहकर अपमानित करती थी। उसके अनुसार, पत्नी उसके चरित्र पर संदेह करती, गाली-गलौज और मारपीट करती थी। बुजुर्ग मां से अलग होकर रहने का दबाव बनाती थी।
पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी कई बार आत्महत्या करने की धमकी देती, रात में अचानक मायके जाने की जिद करती और बिना सहमति घर छोड़कर चली जाती थी। गर्भावस्था समाप्त होने की जानकारी उसे बाद में दी गई। पति ने बताया, लगातार तनाव और विवादों के कारण उसका व्यवसाय प्रभावित हुआ और अंततः दुकान बंद करनी पड़ी।
पत्नी वेदवती ने इन आरोपों से इनकार किया। उसका कहना था कि ससुराल में उसे पहली मंजिल के एक कमरे तक सीमित रखा गया, दूसरे कमरों में जाने नहीं देते थे। मायके से मिले सामान को ताले में बंद कर रखते थे। उसने ठीक से भोजन नहीं देने और दहेज के लिए प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया। पत्नी के अनुसार, गर्भ में पल रहे भ्रूण में असामान्यता होने के कारण चिकित्सकीय सलाह पर गर्भपात कराया था। उसने पति की आय अधिक बताते हुए भरण-पोषण की मांग भी की थी। पत्नी ने वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करने की इच्छा जताई थी।
डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के समर घोष बनाम जया घोष सहित अन्य फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य वैवाहिक झगड़े अपने आप में मानसिक क्रूरता नहीं होते। लेकिन लगातार विवाद, गंभीर अविश्वास, अपमानजनक व्यवहार और परिवार के साथ रहने को लेकर लंबे समय तक बने तनाव का संयुक्त प्रभाव ऐसा हो सकता है, जिससे साथ रहना कठिन हो जाए।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए पति के पक्ष में मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की डिक्री जारी करने का आदेश दिया।



