छत्तीसगढ़

CG – डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर स्टैचू के पास, बौद्ध समाज द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती श्रद्धा, गौरव और उत्साह के साथ मनाई गई…

डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर स्टैचू के पास, बौद्ध समाज द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती श्रद्धा, गौरव और उत्साह के साथ मनाई गई।

जगदलपुर। कार्यक्रम की शुरुआत माल्यार्पण एवं सामूहिक अभिवादन से हुई, जहाँ उपस्थित जनसमूह ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

वक्ताओं ने शिवाजी महाराज के जीवन इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किले में हुआ था। उनके पिता शाहाजी भोसले एक प्रतिष्ठित थे तथा माता जीजाबाई ने उन्हें उच्च संस्कार, धर्मनिष्ठा और स्वाभिमान की शिक्षा दी। शिवाजी महाराज ने आगे चलकर मराठा साम्राज्य की स्थापना की और वे एक महान, प्रजाहितकारी एवं दूरदर्शी राजा के रूप में प्रसिद्ध हुए।

उन्होंने मुगल और अन्य अत्याचारी शक्तियों के विरुद्ध संघर्ष कर स्वराज की नींव रखी। 6 जून 1674 को उनका राज्याभिषेक हुआ और वे छत्रपति के रूप में मराठा साम्राज्य के शासक बने। उनका शासन न्याय, सुरक्षा, धार्मिक सहिष्णुता और जनकल्याण पर आधारित था।

वक्ताओं ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि शिवाजी महाराज ने 18 पगड़ (अठारह) जातियों को साथ लेकर स्वराज का निर्माण किया। उन्होंने गरीबों, किसानों और वंचित समाज को सम्मान और संरक्षण दिया। उनकी सेना और प्रशासन में सभी वर्गों को स्थान मिला, जो उनकी सामाजिक समरसता और समानता की भावना को दर्शाता है। महिलाओं के सम्मान की रक्षा हेतु उन्होंने कठोर नियम बनाए और अत्याचार के विरुद्ध सशक्त शासन स्थापित किया।

इस अवसर पर सतीश वानखेडे, दीपिका वानखेडे, दीपाली कदम, रिचा गौरखेड़े, दिशा वानखेडे एवं साकेत वानखेडे सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान पूरे जोश के साथ नारे लगाए गए :—

“छत्रपति शिवाजी महाराज अमर रहें!”
“जय भवानी, जय शिवाजी!”
“माना च मुजरा!”
“स्वाभिमान मुजरा!”

अंत में सभी उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि वे महापुरुषों के आदर्शों पर चलते हुए समाज में समानता, न्याय, स्वाभिमान और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करेंगे। कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

Related Articles

Back to top button