छत्तीसगढ़

CG – छत्तीसगढ़ सरपंच महासंघ का रायपुर में प्रथम प्रदेशस्तरीय सम्मेलन संघ नें सरकार के सामने रखी अपनी 15 सूत्रीय मांगे इनकों बनाया गया उपाध्यक्ष पढ़े पुरी ख़बर

रायपुर//ग्राम पंचायत के विकास और सरपंचों के अधिकारों को लेकर छत्तीसगढ़ सरपंच महासंघ के प्रथम प्रांतीय सम्मेलन एवं विचार- विमर्श रायपुर के होटल द नाइन में आयोजित हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष कपिल देव नायक ने की। कार्यक्रम में प्रदेश महासचिव राजेश्वरी कैलाश आदिल सहित प्रदेश भर के जिलाध्यक्ष, प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य, मीडिया प्रभारी और पंच-प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। जहां सरपंच संघ के कोरबा जिलाध्यक्ष छत्रपाल सिंह राज को सर्वसम्मति से महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया।

बैठक में छत्तीसगढ़ के सभी ग्राम पंचायतों के विकास, सरपंचों के अधिकार, आम जनता की समस्याएं और शासन स्तर पर लंबित महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई तथा सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरपंचों और ग्रामीण जनता के हितों के संरक्षण हेतु सरकार को शांतिपूर्वक तरीके से 15 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा जाएगा। साथ ही प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास की आवाज पहुँचाई जाएगी। सरकार को सौंपी जाने वाली 15 मांगों में आर्थिक व प्रशासनिक मांग- सरपंचों का मानदेय 16 हजार प्रतिमाह किया जाए तथा कार्यकाल के दौरान 1 करोड़ का जीवन बीमा सुनिश्चित किया जाए, पंचायत निधि की राशि जनसंख्या के आधार पर बढाकर 5 लाख की जाए, जेम पोर्टल की अनिवार्यता को पूरी तरह खत्म किया जाए, दर अनुसूची का पुनरीक्षण किया जाए क्योंकि वर्तमान महंगाई में दरें बहुत कम हैं, विकास कार्यों के सुचारू संचालन हेतु न्यूनतम 20% अग्रिम राशि दिए जाने का प्रावधान हो।

ग्रामीण विकास से जुड़ी मांगे में आवास योजना में शासकीय भवनों, पात्र हितग्राहियों का पुनः सर्वे कराया जाए और प्रथम तल निर्माण की अनुमति दी जाए, ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित समस्त विकास कार्यों को अनिवार्य रूप से स्वीकृति प्रदान की जाए, जिला खनिज न्यास की राशि का आवंटन समान रूप से सभी क्षेत्रों में किया जाए, आदर्श ग्राम योजना के क्रियान्वयन व पुनरीक्षण की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए, ग्राम के वास्तविक स्थल एवं आवश्यकताओं के हिसाब से ही प्राक्कलन तैयार कराया जाए। कर्मचारी व अधिकार से जुड़ी मांग में पंचायतों में जनप्रतिनिधि बाधा बन रही धारा 40 एवं अधिशेष प्रस्ताव के प्रावधानों को समाप्त किया जाए, सचिव का गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) सरपंच की सहमति/प्रतिवेदन के बिना न लिखा जाए, निर्विरोध निर्वाचित पंचायतों को प्रोत्साहन स्वरूप पंचायत निधि की राशि तुरंत प्रदान की जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं एवं सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया जाए, सूचना का अधिकार अधिनियम का दुरुपयोग रोकने हेतु स्थानीय व्यक्ति से जुड़े मामलों में स्पष्टता व संशोधन किया जाए।

प्रदेश अध्यक्ष कपिल देव नायक ने कहा कि सरपंच ग्रामीण विकास की रीढ़ है। हमारी मांगे न्यायसंगत है और हम विश्वास करते हैं कि विष्णु देव साय की सरकार इन पर सकारात्मक विचार करते हुए यथाशीघ्र निर्णय लेगी। वहीं प्रदेश महासचिव राजेश्वरी कैलाश आदिल ने कहा कि पंचायतें कमजोर होगी तो गांव कमजोर होगा। इसलिए सरपंचों को अधिकार और सम्मान दोनों मिलना चाहिए।

कार्यक्रम के अंतिम में सरपंच संघ के कोरबा जिलाध्यक्ष छत्रपाल सिंह राज को छत्तीसगढ़ सरपंच महासंघ का प्रदेश उपाध्यक्ष सर्वसम्मति से बनाए जाने पश्चात उन्होंने भी पंचायत व सरपंच हित में कहा कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था की मजबूती तभी संभव है जब गांव के मुखिया यानी सरपंच को आर्थिक और प्रशासनिक अधिकारी मिले। उक्त मांगे सीधे गांव के विकास से जुड़ी हैं, अगर मांगे मानी जाती है तो यह ग्राम स्वराज की दिशा में बड़ा कदम होगा। उक्त कार्यक्रम में कोरबा से सरपंच संघ के जिला सचिव दिलाराम नेताम सहित संघ के अन्य पदाधिकारी सरपंच शामिल हुए।

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