छत्तीसगढ़

CG- किसान नेता गिरफ्तार : लगे ये गंभीर आरोप, महासमुंद से ट्रैक्टर-ट्रॉली रैली निकालकर रायपुर जाने की थी तैयारी, जाने क्या है पूरा मामला……

महासमुंद। छत्तीसगढ़ में किसानों और मजदूरों की बकाया राशि के भुगतान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कावेरी सीड्स कंपनी से बकाया भुगतान की मांग को लेकर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली रैली निकालकर रायपुर स्थित कंपनी के कार्यालय का घेराव करने की तैयारी में थे। इसी बीच किसान नेता तेजराम विद्रोही और जुगनू चंद्राकर को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है।

किसान महासमुंद से ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए रायपुर पहुंचकर कंपनी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले थे। उनकी मांग है कि किसानों और मजदूरों की लंबित राशि का भुगतान जल्द किया जाए। इस घटनाक्रम के बाद बकाया भुगतान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद आंदोलनकारी किसानों में आक्रोश है। भारतीय किसान यूनियन ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए किसानों और मजदूरों को उनका बकाया भुगतान दिलाने की मांग तेज कर दी है।

किसान यूनियन के मुताबिक, कावेरी सीड्स कंपनी पर किसानों और मजदूरों का 4.70 करोड़ रुपये से अधिक का मूल भुगतान बकाया है। यूनियन का दावा है कि छत्तीसगढ़ के सात जिलों के 176 किसान इससे प्रभावित हैं। इनमें अकेले महासमुंद जिले के 85 किसानों की राशि लंबित बताई जा रही है।नक्शे देखें

किसान संगठन का कहना है कि करीब 15 महीने के ब्याज को जोड़ने के बाद बकाया राशि बढ़कर 6.11 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। हालांकि, बकाया राशि और प्रभावित किसानों से जुड़े इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि की जानी बाकी है।

किसान नेताओं का आरोप है कि भुगतान को लेकर पहले भी आश्वासन दिए गए, लेकिन किसानों और मजदूरों को उनकी राशि नहीं मिली। इसी के विरोध में किसान यूनियन ने रायपुर स्थित कंपनी कार्यालय के घेराव की तैयारी की थी।

महासमुंद से ट्रैक्टर-ट्रॉली रैली के जरिए रायपुर पहुंचने की योजना थी। लेकिन इससे पहले ही तेजराम विद्रोही और जुगनू चंद्राकर को हिरासत में लिए जाने की सूचना सामने आई।

किसान नेताओं ने आंदोलनकारियों को रोके जाने पर नाराजगी जताई है। यूनियन का कहना है कि किसानों और मजदूरों के बकाया भुगतान की मांग पर कार्रवाई करने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।

फिलहाल किसानों की प्रमुख मांग बकाया राशि का भुगतान और मामले का समाधान है। इस घटनाक्रम पर प्रशासन तथा कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

Related Articles

Back to top button