CG – लकड़ी माफिया की जंगल कटाई रोकने में वन विभाग नाकाम कभी सीपत तो कभी जोंधरा क्षेत्र से सामने आ रहा मामला पढ़े पूरी ख़बर
बिलासपुर//मस्तूरी क्षेत्र में कुछ लोग जंगलों कों काट कर अपनी जेब भरने में लगे हैँ जो जंगल कभी हरा भरा हुआ करता था अब वीरान लगने लगा हैँ,ताज़ा मामला मस्तूरी के अंतिम छोर में बसे ग्राम आमाकोनी और आमगाँव कों जोड़ने वाले रोड़ किनारे की हैँ जहाँ ब्यापार के लिए पेंडो कों मशीन से काटा जा रहा हैँ और बेचा जा रहा हैँ जिससे धीरे धीरे वन क्षेत्र सिमट रहा हैँ यहाँ से वहां तक खोखला नजर आने लगे हैँ और विभाग के अधिकारी और जिम्मेदार नदारत हैँ। बताते चलें की वन विभाग की अनुमति या जरूरी अनुज्ञा के बिना सरकारी या आरक्षित जंगलों से पेड़ों की कटाई करना अवैध मानी जाती है। इसमें गाँवों के आसपास के सार्वजनिक भूभाग या “प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट” से लकड़ी लेना भी आता है, जहाँ बिना नियम के कटाई करना दंडनीय अपराध है।
कानून और सजा
भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 68 के तहत बिना अनुमति पेड़ काटने पर 6 महीने से 3 साल तक की जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है; जुर्माना प्रति पेड़ कई हज़ार रुपये तक हो सकता है।
कुछ राज्यों में वन अधिनियम और राज्य‑विशिष्ट वन नीतियाँ अलग‑अलग जुर्माना और कार्रवाई का प्रावधान करती हैं, जिसमें अवैध लकड़ी जब्त करना, वाहन जब्त करना और आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना शामिल है।
जंगल और गाँवों में समस्याएँ..
कई जगहों पर “लकड़ी माफिया” गहरे जंगलों में छिपकर रोजाना अवैध कटाई करते हैं, जिससे वन संसाधन घट रहे हैं और ग्रामीणों का भी जीवन–निर्वाह प्रभावित होता है। अक्सर वन विभाग की कमजोर निगरानी, ग्रामीणों की जरूरत (चूल्हें, निर्माण) और कभी‑कभी विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से अवैध कटाई रुक नहीं पाती।
आप क्या कर सकते हैं?
अगर आपके इलाके में जंगल या गाँव के आसपास अवैध कटाई दिख रही है तो तुरंत स्थानीय वन विभाग या पुलिस स्टेशन को लिखित/फोन करके शिकायत दर्ज करवाएँ; कई राज्यों में ऑनलाइन वन विभाग पोर्टल भी शिकायत दाखिल करने की सुविधा देते हैं।
साथ ही गाँव/पंचायत स्तर पर जागरूकता फैलाएँ—बच्चों, युवाओं और किसानों को बताएँ कि अवैध कटाई से बाढ़, सूखा, मिट्टी का क्षरण और जलवायु परख कैसे प्रभावित होता है।




