छत्तीसगढ़

CG – पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने जारी किया बयान, जय-वीरू की जोड़ी को लेकर कही ये बात…..

अंबिकापुर। 1975 में एक फिल्म शोले आई थी, जिसमें नायकों की जोड़ी जय-वीरू के किरदारों ने फिल्मों में हीरोज का ऐसा हिट कॉम्बिनेशन दिया कि आज तक जय-वीरू को सफलता की गारंटी माना जाता है। 2023 के चुनाव में कांग्रेस ने भी भूपेश और सिंहदेव की जोड़ी के साथ चुनाव में जैसा ऐतिहासिक मैंडेट पाया उसके बाद इन्हें भी जय-वीरू कहा जाने लगा। इस बिच पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने राजनीति की तुलना बॉलीवुड की चर्चित फिल्म Sholay से करते हुए कहा कि केवल “जय-वीरू” से फिल्म नहीं चलती, उसमें कई किरदार होते हैं और हर किसी की अपनी भूमिका होती है।

मीडिया से बातचीत के दौरान सिंहदेव ने कहा कि 2018 के पहले उन्होंने और उनके साथियों ने मिलकर पार्टी के लिए काम किया था। उस समय कई नेताओं ने मिलकर कांग्रेस को मजबूत बनाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि उस दौर को “जय-वीरू की जोड़ी” कहकर भी देखा जाता रहा, लेकिन राजनीति में हमेशा वही स्थिति बनी नहीं रहती।

सिंहदेव ने फिल्मी उदाहरण देते हुए कहा, “शोले एक ही बनी है, शोले-2 अभी तक आई नहीं। राजनीति में भी ऐसा ही है, हर समय एक ही कहानी नहीं चलती। नई परिस्थितियों के साथ नए किरदार सामने आते हैं और वही आगे की दिशा तय करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि जैसे फिल्म शोले में केवल जय और वीरू ही नहीं थे, बल्कि गब्बर सिंह समेत कई अन्य पात्र भी थे, जिनकी भूमिका से पूरी कहानी आगे बढ़ती है। इसी तरह राजनीति में भी कई लोग मिलकर काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बार-बार वही “जय-वीरू” का दृश्य दिखाया जाएगा तो लोग उससे बोर हो जाएंगे।

सिंहदेव ने कहा कि राजनीति में समय के साथ बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमेशा वही लोग काम करेंगे, ऐसा जरूरी नहीं है। उन्होंने बॉलीवुड के उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे हर फिल्म में केवल Amitabh Bachchan और Dharmendra ही काम नहीं करते, बल्कि नए कलाकार भी आते हैं और नई कहानियां बनती हैं।

अपने बयान में सिंहदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री बनना नहीं है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा लक्ष्य पार्टी को मजबूत करना और आने वाले चुनावों में जीत सुनिश्चित करना है। उनका कहना था कि अगर पार्टी मजबूत होगी और जनता का विश्वास मिलेगा तो बाकी चीजें अपने आप तय हो जाएंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंहदेव का यह बयान छत्तीसगढ़ की राजनीति में बदलते समीकरणों की ओर संकेत करता है। उन्होंने अपने शब्दों में यह संदेश देने की कोशिश की है कि राजनीति में टीमवर्क और नए नेतृत्व का भी महत्व है।अंबिकापुर में दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी इस बयान को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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