छत्तीसगढ़

CG पूर्व सरपंच के रहा वर्तमान सरपंच भी सरकारी राशि उड़ाने में है मस्त… कागजों में हुए बुनियादी विकास के काम धरातल पर नदारद पढ़े पूरी ख़बर

कोरबा पोड़ी//उपरोड़ा कहते है जब पंचायत का मुखिया ही भ्रष्ट्र हो तो गांव विकास की परिकल्पना करना बेमानी साबित होती है..! कुछ इसी तरह का वाक्या पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत के अधीन ग्राम पंचायत कोरबी (सी) का सामने आया है, जहां के तत्कालीन सरपंच ने अपने कार्यकाल में ग्राम विकास के पैसे से जमकर मौज किया और बेहिसाब राशि डकार ली तो वहीं वर्तमान निर्वाचित सरपंच भी सरकारी धन उड़ाने में पीछे नही है और पंचायत सचिव के सांठगांठ से गांव के विकास को दीमक की भांति चट करने में लगे है।

शासकीय राशि का बंदरबांट कैसे किया जाता है, यदि किसी को इसकी कोचिंग लेनी हो तो पोड़ी उपरोड़ा जनपद के ग्राम पंचायत कोरबी (सी) के तत्कालीन व वर्तमान सरपंच और सचिव से ले सकता है। उन्हें इसमें महारत हासिल है। इस पंचायत में सचिव और तात्कालीन सरपंच की जोड़ी ने तो कमाल करते हुए ग्राम विकास के लिए शासन से जारी राशि के लाखों रुपयों का वारा- न्यारा तो किया ही, वर्तमान निर्वाचित सरपंच कीर्ति कुमार उइके द्वारा भी सचिव के सांठगांठ से बिना काम लाखों की राशि निकाल बंदरबांट कर लिया गया है। बीते 2025- 26 में सम्पन्न त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम की जनता ने तत्कालीन सरपंच के भ्रष्ट्राचार को लेकर उसे करारा मजा चखाया और तब सरपंच प्रत्याशी रहे कीर्ति कुमार उइके पर भरोसा जता उसे अपना सरपंच चुना। ग्रामीणों को उम्मीदें थी कि नए सरपंच द्वारा पंचायत के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी, पारदर्शिता के साथ काम होगा और शासन की योजनाओं का लाभ ग्राम के अंतिम पंक्ति में बसे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा। लेकिन ग्रामीणों की इस उम्मीदों पर पानी तब फिरा जब वर्तमान सरपंच भी तत्कालीन सरपंच की भांति पंचायत में भ्रष्ट्राचार को अंजाम देने लगा। हद तो यह है कि तत्कालीन व वर्तमान सरपंच के भ्रष्ट्र कृत्य को जनपद पंचायत में बैठे अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बावजूद भी किसी प्रकार की गंभीरता दिखाई नही पड़ी। यही वजह है कि कोरबी (सी) पंचायत में भ्रष्ट्राचार का क्रम बीते पंचवर्षीय से जारी है।

पेयजल व्यवस्था दुरुस्तीकरण के नाम पर निकाले 3.29 लाख, धरातल पर एक ढेला का काम नही..

वैसे तो वर्तमान सरपंच कीर्ति कुमार उइके और सचिव के मिलीभगत से अनेकों बुनियादी विकास के नाम पर बेहिसाब राशि 15वें वित्त आयोग से निकाले गए है और काम एक ढेला का भी नही कराया गया है। जिनमे से एक पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर 3.29 लाख की राशि 15वें वित्त से निकाली गई है, लेकिन गांव में एक रत्ती भी काम नही कराया गया, जो निम्नानुसार है।

*01:-* हेंडपम्प पानी टंकी सामाग्री, रिचार्ज बाउचर तिथि- 09/03/2025, राशि- 13.000

*02:-* सबमर्सिबल पंप व सिंटेक्स फिटिंग, रिचार्ज बाउचर तिथि- 05/08/2025, राशि- 70.000

03:- सबमर्सिबल पंप सिंटेक्स सामाग्री, रिचार्ज बाउचर तिथि- 06/08/2025, राशि- 70.000

04:- बोर में सबमर्सिबल पंप व सिंटेक्स, रिचार्ज बाउचर तिथि- 10/02/2026, राशि- 70.000

05:- हेंडपम्प पाइप- रॉड सामाग्री, रिचार्ज बाउचर तिथि- 09/03/2026, राशि 36.000

06:- सबमर्सिबल पंप सिंटेक्स फिटिंग, रिचार्ज बाउचर तिथि- 02/09/2026, राशि 70.000

इस भ्रष्ट्राचार के मामले को लेकर इस पंचायत के ग्रामीणों व पंचों ने बताया कि पेयजल व्यवस्था के नाम पर जो लाखों की राशि निकाली गई है, उससे पेयजल से संबंधित कोई काम वर्तमान सरपंच कार्यकाल में देखने को नही मिला है और बगैर काम कराए ही राशि निकाली गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब ग्राम सरपंच ही भ्रष्ट्राचार में लिप्त हो जाए तो भला पंचायत के विकास और कार्यों में पारदर्शिता की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। बहरहाल वर्तमान सरपंच में बिना काम राशि आहरण के अन्य मामलों को भी अगले खबर में उजागर किया जाएगा।

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