छत्तीसगढ़

CG High Court ब्रेकिंग : विदेश से MBBS करने वाले डॉक्टरों को दोहरा झटका, फीस रिफंड और स्टाइपेंड की मांग खारिज…..

बिलासपुर। विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सिम्स बिलासपुर में इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टरों की एक लाख रुपये फीस वापसी की मांग का राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में विरोध किया। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित डॉक्टरों ने इंटर्नशिप के लिए वर्ष 2015 में ही फीस जमा कर दी थी। ऐसे में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) की ओर से मार्च 2022 में जारी नए दिशा-निर्देशों के आधार पर पहले जमा कराई गई फीस वापस नहीं की जा सकती।

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए पैनल अधिवक्ता आकांक्षा वर्मा ने बताया कि 24 नवंबर 2022 को हुई बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया था। बैठक में तय किया गया था कि 4 मार्च 2022 के NMC परिपत्र जारी होने से पहले जिन विदेशी मेडिकल स्नातकों से इंटर्नशिप फीस ली जा चुकी है, उन्हें यह राशि वापस नहीं की जाएगी।

सरकार का पक्ष था कि बाद में जारी दिशा-निर्देशों को आधार बनाकर पहले जमा की गई फीस की वापसी का दावा उचित नहीं है। इसलिए डॉक्टरों की ओर से एक-एक लाख रुपये वापस करने की मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

डॉक्टरों ने इंटर्नशिप में पंजीयन की तारीख से ही भारतीय मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के बराबर स्टाइपेंड देने की मांग की थी। उनका कहना था कि चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने 5 अगस्त 2022 को आदेश जारी कर विदेशी मेडिकल स्नातकों को स्टाइपेंड देने का प्रावधान किया था। इसके बाद उन्हें अगस्त 2022 से भुगतान मिलने लगा, लेकिन इससे पहले की इंटर्नशिप अवधि का स्टाइपेंड नहीं दिया गया।

हाई कोर्ट ने इस मांग पर विचार करते हुए पाया कि याचिकाकर्ताओं की विदेशी मेडिकल डिग्रियां 18 नवंबर 2021 से पहले की थीं। वहीं, अगस्त 2022 से पहले की अवधि का स्टाइपेंड दिलाने के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से कोई अन्य प्रभावी प्रावधान या विशेष निर्देश प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ में हुई। अदालत ने फीस वापसी और पुराने स्टाइपेंड के भुगतान की मांग को स्वीकार नहीं किया और डॉ. श्यामू कुमार जांगड़े सहित अन्य डॉक्टरों की तीनों याचिकाएं खारिज कर दीं।

इस फैसले के बाद सिम्स बिलासपुर में इंटर्नशिप करने वाले संबंधित विदेशी मेडिकल स्नातकों को न तो जमा की गई एक लाख रुपये की फीस वापस मिलेगी और न ही अगस्त 2022 से पहले की अवधि का बकाया स्टाइपेंड मिलेगा।

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