छत्तीसगढ़

CG High Court ब्रेकिंग : 5 शिक्षकों की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, कर्मचारियों के अधिकारों पर सुनाया बड़ा फैसला, जानिये क्या कहा…..

बिलासपुर। हाई कोर्ट के फैसले से शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। 5 शिक्षकों की बर्खास्तगी पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दिया है। कोर्ट ने कहा-बिना विभागीय जांच के सेवा से अलग करना गलत है। जस्टिस पीपी साहू की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ धमतरी जिले के मगरलोड जनपद पंचायत में पदस्थ पांच शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। ये शिक्षक फर्जी नियुक्ति के आरोपों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा सेवा से हटा दिए गए थे।

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता ईश्वरी निर्मलकर सहित पांच अन्य शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मगरलोड में शिक्षा कर्मी वर्ग-3 के पद पर हुई थी। नियमानुसार वर्ष 2009 में इन सभी को नियमित कर दिया गया। इसके बाद शासन के आदेशानुसार वर्ष 2018 में इन शिक्षकों का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में किया गया। सेवा अवधि के दौरान इनके कार्य और वरिष्ठता को देखते हुए वर्ष 2023 में इन्हें प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक (हेडमास्टर) के पद पर पदोन्नत किया गया।

हालांकि, वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ राज्य लोक आयोग में इनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि इन शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई है। इस शिकायत के आधार पर संबंधित थाना में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद वर्ष 2025 में इन शिक्षकों को आरोपी बनाकर कोर्ट में पूरक चालान पेश किया गया। यह मामला वर्तमान में ट्रायल कोर्ट में लंबित है और अब तक इसमें कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

इसी आपराधिक मामले को आधार बनाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा। शिक्षकों ने अपने जवाब में आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति नियमानुसार हुई थी और वे वर्षों से सेवा में हैं। इसके बावजूद 6 जनवरी 2026 को डीईओ ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया।

बर्खास्तगी आदेश से आहत शिक्षकों ने अपने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में दलील दी गई कि यह आदेश छत्तीसगढ़ सिविल सर्विस (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 14 का स्पष्ट उल्लंघन है। नियम 14 के तहत किसी भी शासकीय सेवक को बर्खास्त करने से पहले विभागीय जांच अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं की गई।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर याचिकाकर्ताओं के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया। साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट टिप्पणी की कि केवल आपराधिक मामले लंबित होने के आधार पर, बिना विभागीय जांच, सेवा से बर्खास्तगी नहीं की जा सकती। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने डीईओ द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी है।

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