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CG – चोरी के कोयले और अवैध ईंट भट्ठे से सरकार कों भारी राजस्व का नुकसान कानून का उल्लंघन और पर्यावरण को पहुँचा रहे नुकसान पढ़े पूरी ख़बर

कोरबा//तहसील अंतर्गत नानपुलाली में घर- घर अवैध ईंट निर्माण का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। संबंधित विभाग के जिम्मेदारों द्वारा कोई कार्रवाई न किये जाने से कोयला चोरी एवं रेत चोरी की वारदातें आम हो गई है। जहां प्राकृतिक संपदा का दोहन कर पर्यावरण को हानि पहुँचाई जा रही है वहीं शासन को भी राजस्व में नुकसान सहना पड़ा रहा है।

नानपुलाली में वर्तमान घर- घर ईंट भट्ठे सुलगते दिखाई दे रहे है। जिसकी कोई जांच या कार्रवाई नही होने से ईंट निर्माण करने वाले ग्रामीणों के हौसले बुलंद है। इन ईंट भट्ठों में बुड़बुड़ खुली खदान से चोरी कर लाए गए कोयले का उपयोग हो रहा है। प्रशासनिक अमला सीधे तौर पर कार्रवाई न कर पाए इसलिए 15 से 20 हजार तक का एक- एक भट्ठा तैयार करके यह अवैध धंधा संचालित किया जा रहा है। जिससे लोगों को कोयले के जहरीले धुंए का भी सामना करना पड़ रहा है। यह ईंट आसपास ग्रामों में प्रधानमंत्री आवास और अन्य कई निर्माण कार्यों में ऊंची कीमत पर बेची जा रही है।

जिसकी न तो अनुमति का पता न रॉयल्टी का पता। समीप खदान से कोयले की चोरी के काम मे 16- 17 साल के नाबालिग लड़कों को काम पर लगाया गया है, जो पढ़ाई- लिखाई छोड़कर नशे का खर्च निकालने के लिए कोयला चोरी करते है और साइकिल व बाइक के माध्यम से इन्ही ईंट भट्ठों में पहुँचाकर अपना खर्च निकालते है। प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन की उदासीनता से नानपुलाली में अवैध ईंट भट्ठे दिन ब दिन गुलजार होते जा रहे है। इससे खुली खदान से कोयला चोरी की घटनाओं में भी जमकर इजाफा हुआ है। कोयला खदान की सुरक्षा में लगे त्रिपुरा राइफल के जवान न तो धरपकड़ की कार्रवाई कर पा रहे है और न ही कोयला चोरी पर रोक लगा पा रहे है। वहीं ईंट भट्ठे पकाने वाले शासन की अनुमति के बिना ईंट भट्ठों को संचालित कर रहे है। ईंट भट्ठों के मालिकों के पास कोई भी जायज कागज या लाइसेंस नही है। ऐसे में अवैध तरीके से पकाई जा रही ईंटें न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचा रहा है।

जिसकी जांच और कार्रवाई अति आवश्यक है। क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमी, समाजसेवियों ने जिले के खनिज विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों से अपील की है कि क्षेत्र में अवैध रूप से धधक रहे ईंट भट्ठों की जांच कर उचित कार्रवाई करें ताकि पर्यावरण के साथ राजस्व हानि को बचाया जा सके।

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