CG : स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशे की नो-एंट्री, ड्रग-फ्री जोन बनाने की पहल तेज…..

बिलासपुर। देशभर के स्कूलों और कॉलेजों को नशामुक्त परिसर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल तेज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ में भी इस योजना को लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री जोन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। राज्य के नगरीय निकायों को इस अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 26 जून 2026 को नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) समिति की दसवीं बैठक हुई थी। बैठक में दिए गए निर्देशों के पालन के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को पत्र जारी किया है। इसके तहत निकायों को नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर उनकी जानकारी राज्य सरकार को भेजनी होगी।
युवाओं को नशे से दूर रखने पर रहेगा जोर
इस अभियान का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में आने से बचाना भी है। इसके लिए स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने, खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अभियान में संतों, युवाओं और मातृशक्ति की भागीदारी बढ़ाने की भी योजना है, ताकि समाज के विभिन्न वर्गों को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा सके। इसके साथ ही नशे के आदी लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उन्हें इलाज और पुनर्वास की सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।
नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश
नगरीय प्रशासन संचालनालय ने सभी नगरीय निकायों से नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों के नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर मांगे हैं। क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को सात दिनों के भीतर अधीनस्थ निकायों से जानकारी एकत्र कर प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इससे अभियान की निगरानी और अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां तय करने में मदद मिलेगी।
निगरानी और जागरूकता से मिलेगी मदद
स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता से जुड़े जोखिम कम करना, युवाओं को जागरूक करना और जरूरतमंद लोगों को उपचार उपलब्ध कराना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं। इसके लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।
हालांकि, ड्रग-फ्री जोन बनाने की पहल कितनी प्रभावी होगी, यह जमीनी स्तर पर निगरानी, जागरूकता अभियानों और पुनर्वास सुविधाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।



