छत्तीसगढ़

CG – गैर कानूनी ढंग से हो रही अमलडीहा उदईबंद रेत घाट में खनन ग्रामीण पस्त अधिकारी मस्त आक्रोश में पब्लिक जानें इससे जुड़ी सभी नियम पढ़े पूरी ख़बर

मस्तूरी//बिलासपुर जिले का मस्तूरी विधानसभा में रेत का अवैध परिवहन लगातार जारी है जिसके कारण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने जोंधरा से गोपालपुर परसोड़ी कुकुर्दीकला अमलडीहा पहुंच मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है जिसको लेकर ग्रामीणों के साथ जनप्रतिनिधियों ने कुछ दिनों पहले ही उच्च अधिकारियों से शिकायत भी किया है पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है जिसकी वजह से अब ग्रामीण भारी आक्रोषित हो गए हैं।

कुकुर्दीकला सरपंच पति कृपाल सिंह पैकरा बताते हैं कि अमलडीहा उदईबंद रेत घाट से नियम विरुद्ध सप्लाई लगातार जारी है रेत घाट का ठेकेदार लगातार पर्यावरण नियमों को दरकिनार कर रात भर अवैध तरीके से रेत का परिवहन करवा रहा है और अधिकारियों से शिकायत करने पर भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

वही जनपद सदस्य जमुना पैकरा नें बताया की हमने अपने लेटर हेड में कई बार इनके द्वारा कराए जा रहे नियम विरुद्ध रेत खनन की शिकायत की है पर ना ही उच्च अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्रवाई की है और ना ही खनिज विभाग इसको लेकर गंभीर है जिसके कारण गुस्साए ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले गोठान के सामने वाली कच्ची रोड को खो दिया था जिसके कारण एक दिन इनका रात में चलने वाला नियम विरुद्ध खनन और सप्लाई रुक गई थी पर दूसरे दिन उन्होंने उस गड्ढे को फिल कर दिया और फिर से रात वाली नियम विरुद्ध रेत की सप्लाई शुरू कर दी।

क्या है रेत खनन का का नियम..

रात में रेत घाट को संचालित करना गैरकानूनी है और इसे आम तौर पर बंद रखा जाता है। इसके पीछे पर्यावरणीय, कानूनी सुरक्षात्मक कारण मुख्य हैं: पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन: राष्ट्रीय हरित अधिकरण और ‘सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देश 2016’ के अनुसार, नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए रात में रेत निकालना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। नदी के इकोसिस्टम को नुकसान: रात के समय की गई माइनिंग से नदी के किनारे को गहरा नुकसान पहुँचता है, कटाव बढ़ता है और जलीय जीवों के आवास नष्ट होते हैं। अवैध खनन पर रोक: रात में अवैध रेत माफिया सक्रिय हो जाते हैं, जो अनुमति प्राप्त मात्रा से अधिक और प्रतिबंधित क्षेत्रों से रेत निकालते हैं। रात में काम होने से सरकारी निगरानी मुश्किल हो जाती है। पोकलेन मशीनों पर प्रतिबंध: नदी के अंदर मशीनों (पोकलेन/जेसीबी) का उपयोग करके सीधे नदी के तल से रेत निकालना प्रतिबंधित है, जिसे अक्सर रात में चुपके से किया जाता है। सुरक्षा और डकैती का डर: रात के अंधेरे में रेत घाटों पर आपराधिक गतिविधियों और हिंसक हमलों का जोखिम अधिक होता है। नियम के मुताबिक काम का समय: आमतौर पर रेत खनन का काम सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे (दिन के उजाले में) ही मान्य है।

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