छत्तीसगढ़

CG: इन चर्चों में गैर-ईसाइयों की प्रार्थना पर लगी रोक, इस वजह से लिया फैसला…..

धमतरी। धार्मिक बैठकों और कथित धर्मांतरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच छत्तीसगढ़ के धमतरी में कुछ चर्चों ने अपने परिसर में गैर-ईसाइयों के प्रार्थना के लिए प्रवेश को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। जानकारी के मुताबिक शहर के कम से कम आठ चर्चों के बाहर नोटिस और बैनर लगाए गए हैं, जिनमें कहा गया है कि अन्य धर्मों के लोग यदि स्वेच्छा से चर्च में प्रवेश करते हैं तो वे अपने निर्णय और उसके लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे। ईसाई समुदाय की ओर से इसे सदस्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एहतियाती कदम बताया गया है।

चर्चों के बाहर लगाए गए नोटिस

धमतरी के करीब 116 साल पुराने सुंदरगंज मेनोनाइट चर्च के बाहर लगाए गए नोटिस में कहा गया है कि चर्च प्रबंधन के नियमों के अनुसार चर्च भवन में प्रार्थना के लिए प्रवेश केवल ईसाइयों के लिए है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि अन्य धर्मों से जुड़े लोग यदि अपनी इच्छा से चर्च परिसर में प्रवेश करते हैं, तो इसके लिए उनकी स्वयं की जिम्मेदारी होगी।

यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब जिले में धार्मिक बैठकों के दौरान कथित धर्मांतरण को लेकर विवाद चल रहा है। चर्च प्रबंधन और ईसाई समुदाय का कहना है कि हाल की परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाया गया है।

15 सितंबर की बैठक के बाद लागू हुआ फैसला

धमतरी जिला क्रिश्चियन फोरम के महासचिव डायमंड फिलुस के अनुसार, चर्चों में नोटिस लगाने का फैसला इसी महीने की शुरुआत में लिया गया था, लेकिन इसे 15 सितंबर को जिला कलेक्ट्रेट में हुई बैठक के बाद लागू किया गया। इस बैठक में हिंदू संगठनों, सर्व आदिवासी समाज और क्रिश्चियन फोरम के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

फिलुस का कहना है कि ईसाई प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं थी कि हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद रहेंगे।

उनके अनुसार बैठक में गैर-ईसाइयों के चर्चों में जाने का मुद्दा उठाया गया और यह मांग रखी गई कि जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है, उन्हें चर्च में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। फिलुस ने दावा किया कि बैठक में मौजूद कुछ अधिकारियों की ओर से भी इस मांग का समर्थन किया गया।

सुरक्षा को लेकर उठाया गया कदम

क्रिश्चियन फोरम की ओर से दावा किया गया कि धर्मांतरण के आरोपों को लेकर पहले भी कुछ प्रार्थना सभाओं में विवाद और हंगामे की घटनाएं सामने आई थीं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों पर आने वाले लोगों को लेकर स्पष्ट नियम बनाने का फैसला लिया गया।

फोरम ने जिले के अन्य क्षेत्रों में स्थित चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों के बाहर भी इसी तरह के नोटिस लगाने के लिए समुदाय के सदस्यों से कहा है।

नए धर्मांतरण विरोधी कानून का भी जिक्र

यह घटनाक्रम छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के लागू होने के कुछ महीनों बाद सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों में सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सामूहिक धर्मांतरण से जुड़े मामलों में भी कड़े दंड का प्रावधान बताया गया है।

क्रिश्चियन फोरम के मुताबिक, 15 सितंबर की बैठक जिला कलेक्ट्रेट में बड़ी संख्या में लोगों द्वारा स्व-घोषणा फॉर्म जमा किए जाने के बाद हुई थी। फोरम का कहना है कि इन घोषणाओं में संबंधित लोगों ने चर्च या प्रार्थना सभा स्थलों में अपनी इच्छा से और अपनी जिम्मेदारी पर धार्मिक बैठकों में शामिल होने की बात कही थी।

प्रशासन ने टिप्पणी से किया इनकार
मामले को लेकर धमतरी की अतिरिक्त कलेक्टर इंदिरा सिंह देहरी ने कहा कि वह इस विषय पर टिप्पणी करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। वहीं जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा कि मामला सुलझा लिया गया है, लेकिन उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया।

फिलहाल धमतरी में चर्चों के बाहर लगाए गए इन नोटिसों के बाद धार्मिक बैठकों और गैर-ईसाइयों के प्रवेश को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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