CG – पोड़ी उपरोड़ा बीईओ पर गंभीर आरोप एसआईआर ड्यूटी करने वाले शिक्षक का वेतन बिना स्पष्ट कारण रोका शिक्षक समाज मे पनपने लगा आक्रोश पढ़े पूरी ख़बर
0 खंड शिक्षाधिकारी के कार्य संस्कृति पर गहरा प्रश्नचिन्ह.
0 जिला प्रशासन को गंभीरता से संज्ञान लेने की जरूरत.
कोरबा//आवश्यक कार्रवाई के अभाव में पोड़ी उपरोड़ा बीईओ के हौसले आसमान की बुलंदियों को छूने के साथ उनकी मनमानी इन दिनों चरम पर पहुँच चुकी है। शिक्षकों का अटैचमेंट, नोटिस की आड़ में उगाही, मनमाने अवकाश स्वीकृत करने सहित कई मामलों को लेकर उनकी कार्यशैली पर दिन ब दिन गंभीर सवाल उठने लगे है। मनमानी की हद तो तब हो गई जब उन्होंने एसआईआर ड्यूटी करने वाले शिक्षक का वेतन बिना किसी ठोस कारण रोक दिया। निर्वाचन कार्यभार का दबाव, ऊपर से बीईओ द्वारा वेतन रोकने जैसे मानसिक प्रताड़ना से आहत शिक्षक डिप्रेशन में है। पोड़ी उपरोड़ा बीईओ की ऐसी मनमानी और अहंकार के कारण शिक्षकों में भय का माहौल बन गया है, तो दूसरी ओर शिक्षक समाज मे आक्रोश का माहौल निर्मित होने लगा है।
जिले के पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ खंड शिक्षा अधिकारी के. राजेश्वर दयाल शायद अपने आप को जिला प्रशासन से ऊपर समझने लगे है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने पोड़ी उपरोड़ा अनुविभागीय अधिकारी एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के आदेश पर निर्वाचन नामावलियों के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत वर्ष 2003 एवं 2025 की मतदाता सूची के मध्य मतदाताओं के नामो का मिलान करने साथ ही ऑनलाइन एंट्री जैसे ड्यूटी में संलग्न रहने वाले एक शिक्षक का वेतन अकारण रोक दिया है। अनुविभागीय अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा द्वारा एसआईआर कार्य संपादित किये जाने हेतु बीईओ दयाल को पत्र क्रमांक/ 2053/ अविअ./ निर्वा. /2025, दिनांक- 23 सितंबर 2025 को सूचित/निर्देशित कर 10 शिक्षकों को अपने अधीन संलग्न किया गया। जिनमे प्राथमिक शाला कारीमाटी में पदस्थ प्रधान पाठक कुनाल पाल सिंह भी शामिल रहा और उन्होंने आदेश के पालन में 16 जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक नियमित एसआईआर में ड्यूटी की। जिनके उपस्थिति पत्र कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा बीईओ को भेजने के बाद भी उक्त शिक्षक के इस अवधि का वेतन बिना पूर्व सूचना या कारण बताओ नोटिस के रोक दिया गया है, जिससे शिक्षक को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक कुनाल पाल पर गुर्रमुड़ा बीएलओ कार्य की भी जिम्मेदारी है।
ऐसे में बीएलओ/एसआईआर कार्यों के तहत फॉर्म एकत्र करने, डेटा मिलान और फिजिकल वेरिफिकेशन के भारी दबाव के बाद भी बीईओ द्वारा अकारण वेतन रोके जाने से वे मानसिक और आर्थिक रूप से काफी डिप्रेशन में है। इसे लेकर शिक्षक समाज मे गुस्सा पनपने लगा है। शिक्षकों का कथन है कि बीईओ द्वारा निज स्वार्थ सिद्धि की कामना को लेकर एसआईआर ड्यूटी में कथित लापरवाही पर शिक्षक का वेतन बिना पूर्व सूचना या कारण बताओ नोटिस के रोक दिया गया है, जबकि शिक्षक ड्यूटी पर तैनात था। बीईओ का यह रवैया नियमो के विरुद्ध है। यदि शिक्षक अपना कर्तव्य ईमानदारी से पूरा करता है तो उसे बिना उचित कारण बताए वेतन न देना कानूनी तौर पर गलत है।
शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि बीईओ अपनी मनमानी राज चला रहे है, उन्हें शासन- प्रशासन का जरा भी भय नही है। यह मामला सिर्फ एक शिक्षक की त्रासदी नही, बल्कि पोड़ी उपरोड़ा खंड शिक्षाधिकारी के कार्य संस्कृति पर गहरा प्रश्नचिन्ह है। क्यों एक शिक्षक को अपने वेतन के लिए अकारण वंचित होना पड़ रहा है? अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नही की तो पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड के शिक्षक आंदोलन की राह पर उतर सकते है।




